Page 577 Class 10 Hindi पाठ 2. विष के दाँत

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गद्य खण्ड

2. विष के दाँत

(नलिन विलोचन शर्मा)

बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी पाठ्यपुस्तक का दूसरा अध्याय विष के दाँत श्री नलिन विलोचन शर्मा द्वारा रचित एक मार्मिक कहानी है। यह कहानी समाज में व्याप्त वर्ग भेद और अनुचित विशेषाधिकारों के दुष्परिणामों को दर्शाती है। लेखक ने एक धनी परिवार और उस पर निर्भर एक गरीब परिवार के बीच के संबंधों को चित्रित किया है, जिसमें अमीर परिवार के लाड़ले बेटे और गरीब परिवार के बच्चे के बीच हुई एक घटना के माध्यम से समाज की विषमताओं को उजागर किया गया है। यहाँ हमने आपको विष के दाँत से प्रश्न और उत्तर भी उपलब्ध करवाएं रहें हैं।

 

प्रश्न 1. कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: विष के दाँत शीर्षक अमीर वर्ग के शोषण और अत्याचार का प्रतीक है। कहानी में खोखा के टूटे दाँत इस शोषण का मूर्त रूप हैं, जबकि मदन का विद्रोह इन विष के दाँतों को तोड़ने का प्रयास है। यह शीर्षक समाज में व्याप्त असमानता और अन्याय को दर्शाता है, साथ ही गरीबों के प्रतिरोध की शक्ति को भी प्रकट करता है।

 

प्रश्न 2. सेन साहब के परिवार में बच्चों के पालन-पोषण में किए जा रहे लिंग आधारित भेद-भाव का अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।

उत्तर: सेन परिवार में लिंग आधारित भेदभाव स्पष्ट दिखाई देता है। पाँच लड़कियों पर कड़ा अनुशासन लागू होता है, जबकि एकमात्र लड़के खोखा को विशेष छूट मिलती है। यह भेदभाव न केवल नियमों में, बल्कि प्यार और स्नेह के वितरण में भी दिखता है। खोखा को बुढ़ापे की आँखों का तारा मानकर उसे अधिक स्वतंत्रता दी जाती है, जो लड़कियों के लिए उपलब्ध नहीं है।

 

प्रश्न 3. खोखा किन मामलों में अपवाद था?

उत्तर: खोखा घर के नियमों का अपवाद था। उसे नई कार के पास जाने की छूट थी, जबकि अन्य बच्चों को यह अनुमति नहीं थी। वह परिवार में सबसे छोटा और देर से पैदा हुआ बच्चा होने के कारण विशेष स्नेह का पात्र था। उसके लिए घर के सामान्य नियम लागू नहीं होते थे, और उसे अधिक स्वतंत्रता दी जाती थी।

 

प्रश्न 4. सेन दंपती खोखा में कैसी संभावनाएँ देखते थे और उन संभावनाओं के लिए उन्होंने उसकी कैसी शिक्षा तय की थी?

उत्तर: सेन दंपती खोखा में अपने पिता की तरह इंजीनियर बनने की संभावना देखते थे। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, उन्होंने एक अनोखी शिक्षा पद्धति अपनाई। वे कारखाने से बढ़ई मिस्त्री को घर बुलाकर खोखा को प्रैक्टिकल ज्ञान देने का प्रबंध करते थे। इससे खोखा को छोटी उम्र से ही औजारों से परिचित कराया जाता था, ताकि वह भविष्य में एक कुशल इंजीनियर बन सके।

 

प्रश्न 5. सप्रसंग व्याख्या कीजिए

(क) लड़कियाँ क्या है, कठपुतलियाँ हैं और उनके माता-पिता को इस बात का गर्व है।

उत्तर: यह पंक्ति नलिन विलोचन शर्मा की कहानी विष के दाँत से ली गई है, जो सेन परिवार में लड़कियों की स्थिति का वर्णन करती है। यह वाक्य समाज में व्याप्त लैंगिक भेदभाव और रूढ़िवादी सोच को दर्शाता है। लेखक यहाँ व्यंग्यात्मक ढंग से बताते हैं कि लड़कियों को स्वतंत्र व्यक्तित्व के बजाय नियंत्रित कठपुतलियों की तरह देखा जाता है। माता-पिता इस तरह की अनुशासित बेटियों पर गर्व करते हैं, जो समाज के नियमों का पालन करती हैं। यह दृष्टिकोण लड़कियों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और विकास को सीमित करता है, जो एक स्वस्थ समाज के लिए हानिकारक है।

 

(ख) खोखा के दुर्ललित स्वभाव के अनुसार ही सेनों ने सिद्धान्तों को भी बदल लिया था।

उत्तर: यह वाक्य सेन परिवार में बेटे खोखा के प्रति व्यवहार को दर्शाता है। खोखा, जो परिवार का इकलौता और छोटा बेटा है, को विशेष दर्जा प्राप्त है। उसके लिए परिवार के नियम और सिद्धांत बदल दिए गए हैं। यह परिवार में लैंगिक भेदभाव का स्पष्ट उदाहरण है, जहाँ लड़के को अधिक स्वतंत्रता और छूट दी जाती है। सेन दंपति खोखा के शरारती व्यवहार को न केवल स्वीकार करते हैं, बल्कि उसे प्रोत्साहित भी करते हैं। यह रवैया न केवल खोखा के व्यक्तित्व विकास के लिए हानिकारक है, बल्कि परिवार में लड़कियों के साथ किए जाने वाले भेदभाव को भी उजागर करता है। यह स्थिति समाज में व्याप्त लैंगिक असमानता का प्रतिबिंब है।


(
ग) ऐसे ही लड़के आगे चलकर गुंडे, चोर और डाकू बनते हैं।

उत्तर: यह वाक्य नलिन विलोचन शर्मा की कहानी विष के दाँत से लिया गया है। यह सेन साहब द्वारा गिरधारी के बेटे मदन के बारे में कही गई टिप्पणी है। इस वाक्य में समाज में व्याप्त वर्ग भेद और पूर्वाग्रह का स्पष्ट चित्रण है। सेन साहब, जो एक उच्च वर्ग के व्यक्ति हैं, गरीब परिवार के बच्चे के व्यवहार को नकारात्मक दृष्टि से देखते हैं। वे मदन की शरारत को अपराधी प्रवृत्ति से जोड़ते हैं, जबकि अपने बेटे खोखा के समान व्यवहार को अनदेखा करते हैं। यह दोहरा मापदंड समाज में गरीब और अमीर वर्ग के बीच की खाई को दर्शाता है। लेखक इस वाक्य के माध्यम से समाज में व्याप्त असमानता और पूर्वाग्रहों पर करारा व्यंग्य करते हैं, जो गरीब बच्चों के भविष्य को लेकर नकारात्मक धारणाएं बनाते हैं।

 

(घ) हंस कौओं की जमात में शामिल होने के लिए ललक गया।

उत्तर: यह पंक्ति विष के दाँत कहानी से ली गई है, जो सामाजिक असमानता का एक प्रभावशाली चित्रण प्रस्तुत करती है। यहाँ हंस सेन परिवार के बेटे खोखा का प्रतीक है, जो उच्च वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि कौए गरीब बच्चों का प्रतीक हैं। यह रूपक समाज में मौजूद वर्ग भेद को दर्शाता है, जहाँ अमीर और गरीब बच्चों के बीच एक अदृश्य दीवार खड़ी है। खोखा का गरीब बच्चों के साथ खेलने की इच्छा रखना दो वर्गों के बीच की खाई को पाटने की एक मासूम कोशिश है। लेकिन समाज के ठोस वर्ग विभाजन के कारण यह मिलन संभव नहीं हो पाता। लेखक इस प्रतीकात्मक भाषा के माध्यम से समाज में व्याप्त असमानता और भेदभाव पर गहरा व्यंग्य करते हैं, साथ ही बच्चों की निर्दोष दुनिया में भी वयस्कों के पूर्वाग्रहों के प्रवेश पर चिंता व्यक्त करते हैं।


प्रश्न 6. सेन साहब के और उनके मित्रों के बीच क्या बातचीत हुई और पत्रकार मित्र ने उन्हें किस तरह उत्तर दिया?

उत्तर: सेन साहब और उनके मित्रों के बीच बच्चों के भविष्य पर चर्चा हुई। सेन साहब ने अपने बेटे खोखा को इंजीनियर बनाने की इच्छा व्यक्त की। जब पत्रकार मित्र से उनके बेटे के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि उनका बेटा एक सज्जन बने और अपना कैरियर चुनने के लिए स्वतंत्र हो। यह उत्तर सेन साहब के दृष्टिकोण पर एक सूक्ष्म व्यंग्य था, जिससे वे असहज हो गए।

 

प्रश्न 7. मदन और ड्राइवर के बीच के विवाद के द्वारा कहानीकार क्या बताना चाहता है ?

उत्तर: कहानीकार मदन और ड्राइवर के विवाद के माध्यम से समाज में व्याप्त वर्गभेद और असमानता को दर्शाता है। ड्राइवर का व्यवहार उच्च वर्ग की अहंकारपूर्ण मानसिकता को प्रतिबिंबित करता है, जबकि मदन गरीब वर्ग का प्रतीक है। यह घटना समाज में मौजूद अमीर-गरीब के बीच की खाई और अन्याय को उजागर करती है।

 

प्रश्न 8. काशू और मदन के बीच झगड़े का कारण क्या था ? इस प्रसंग के द्वारा लेखक क्या दिखाना चाहता है ?

उत्तर: काशू और मदन के बीच झगड़े का कारण लट्टू था, जिसे काशू मदन से माँग रहा था। यह प्रसंग दिखाता है कि बच्चों में वर्गभेद की समझ नहीं होती। लेखक यहाँ बताना चाहते हैं कि स्वाभाविक रूप से सभी बच्चे समान होते हैं, और सामाजिक भेदभाव सीखा जाता है, जन्मजात नहीं होता।

 

प्रश्न 9. ‘महल और झोपड़ी वालों की लड़ाई में अक्सर महल वाले ही जीतते हैं, पर उसी हालत में जब दूसरे झोपड़ी वाले उनकी मदद अपने ही खिलाफ करते हैं। लेखक के इस कथन को कहानी से एक उदाहरण देकर पुष्ट कीजिए।

उत्तर: लेखक के कथन को कहानी में मदन और खोखा की लड़ाई से समझा जा सकता है। जब मदन खोखा को मारता है, तो वह अपने वर्ग के खिलाफ खड़ा होता है। यह घटना दर्शाती है कि जब निम्न वर्ग के लोग एकजुट होकर अन्याय का विरोध करते हैं, तो वे शक्तिशाली वर्ग को चुनौती दे सकते हैं।

 

प्रश्न 10. रोज-रोज अपने बेटे मदन की पिटाई करने वाला गिरधर मदन द्वारा काशू की पिटाई करने पर उसे दंडित करने के बजाय अपनी छाती से क्यों लगा लेता है ?
उत्तर: गिरधर मदन को इसलिए छाती से लगा लेता है क्योंकि उसने अपने बेटे में वह साहस देखा जो वह खुद कभी नहीं दिखा पाया। मदन का काशू के प्रति व्यवहार उस अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध था जिसे गिरधर हमेशा सहन करता रहा। यह क्षण गिरधर के लिए अपने बेटे पर गर्व और अपनी दमित इच्छाओं की पूर्ति का प्रतीक बन गया।

 

प्रश्न 11. सेन साहब, मदन, काश और गिरधर का चरित्र-चित्रण करें।

उत्तर:
सेन साहब: वे एक उच्च वर्गीय व्यक्ति हैं जो अपने पद और संपत्ति पर गर्व करते हैं। वे दिखावे और सामाजिक प्रतिष्ठा को महत्व देते हैं। अपने बेटे के भविष्य को लेकर महत्वाकांक्षी हैं, लेकिन उनमें संवेदनशीलता की कमी है।

मदन: गरीब परिवार का साहसी और स्वाभिमानी लड़का है। वह अन्याय के खिलाफ आवाज उठाता है और समानता में विश्वास करता है। उसमें बाल सुलभ शरारत के साथ-साथ नैतिक साहस भी है।

काशू: सेन साहब का पुत्र है जो अत्यधिक लाड़-प्यार में पला है। वह अहंकारी और शरारती स्वभाव का है। उसमें गरीबों के प्रति संवेदनशीलता की कमी है।

गिरधर: मदन का पिता और सेन साहब का कर्मचारी है। वह एक सरल और ईमानदार व्यक्ति है जो अपने मालिक के प्रति वफादार है। हालांकि, वह अपने बेटे के साहस से प्रेरित होता है।


प्रश्न 12.  आपकी दृष्टि में कहानी का नायक कौन है ? तर्कपूर्ण उत्तर दें।

उत्तर: इस कहानी का नायक मदन है। वह कहानी का केंद्रीय पात्र है जो घटनाओं को आगे बढ़ाता है और पाठकों की सहानुभूति जीतता है। मदन का चरित्र सबसे अधिक विकसित और प्रभावशाली है। वह गरीबी और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ खड़ा होता है, जो कहानी का मुख्य विषय है। उसका काशू से संघर्ष कहानी का मुख्य मोड़ है, जो वर्ग संघर्ष का प्रतीक बनता है। मदन के साहस और स्वाभिमान से कहानी का संदेश स्पष्ट होता है। इसलिए, मदन को इस कहानी का नायक माना जा सकता है।

 

प्रश्न 13. आरंभ से ही कहानीकार का स्वर व्यंग्यपूर्ण है। ऐसे कुछ प्रमाण उपस्थित करें।

उत्तर: कहानीकार का व्यंग्यपूर्ण स्वर कई स्थानों पर दिखाई देता है:

पाँचों लड़कियाँ तो तहजीब और तमीज की तो जीती-जागती मूरत ही हैं।यह वाक्य लड़कियों के प्रति समाज के दोहरे मानदंडों पर व्यंग्य करता है।

जैसे कोयल घोंसले में से कब उड़ जाय।यह उपमा बेटियों को बोझ समझने की मानसिकता पर कटाक्ष है।

चमक ऐसी कि अपना मुँह देख लो।यह वाक्य दिखावटी चमक-दमक पर व्यंग्य करता है।

सेन साहब द्वारा अपने बेटे के बारे में बार-बार बढ़ा-चढ़ाकर बातें करना भी व्यंग्य का एक उदाहरण है।

गरीब बच्चे को मोटर छूने पर धकेलना यह घटना समाज में व्याप्त असमानता पर तीखा व्यंग्य है।

इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि लेखक ने समाज की विसंगतियों को व्यंग्यात्मक शैली में प्रस्तुत किया है।


प्रश्न 14. ‘विष के दाँत कहानी का सारांश लिखें।

उत्तर: विष के दाँत कहानी समाज में व्याप्त वर्गभेद और असमानता को दर्शाती है। कहानी में सेन साहब एक धनी व्यक्ति हैं, जिनके बेटे काशू और गरीब कर्मचारी के बेटे मदन के बीच संघर्ष केंद्रीय घटना है। सेन साहब की नई गाड़ी को छूने पर मदन को दंडित किया जाता है, जो वर्गभेद को दर्शाता है। बाद में, मदन और काशू के बीच लड़ाई होती है, जिसमें मदन काशू को हराता है। यह घटना गरीब वर्ग के प्रतिरोध का प्रतीक बनती है। कहानी में मदन के पिता गिरधर का चरित्र भी महत्वपूर्ण है, जो अंत में अपने बेटे के साहस पर गर्व महसूस करता है। कहानी समाज में व्याप्त असमानता, अन्याय और वर्गभेद पर गहरा प्रहार करती है, साथ ही यह दिखाती है कि कैसे साहस और स्वाभिमान इन बाधाओं को तोड़ सकते हैं।

 

भाषा की बात

प्रश्न 1. कहानी से मुहावरे चुनकर उनके स्वतंत्र वाक्य प्रयोग करें।

उत्तर:
आखों का तारा:-  मोहन अपने माता-पिता के आखों का तारा है।

जीती-जागती मूरत- सेन साहब पुत्री तहजीब और तमीज में जीती जागती मूरत है।

किलकारी मारना:  मोहन अपने मित्र के बातों पर किलकारी मारता है।


प्रश्न 2. कहानी से विदेशज शब्द चुनें और उनका स्रोत निर्देश करें।

उत्तर: स्वयं करें।

 

प्रश्न 3. कहानी से पाँच मिश्र वाक्य चुनें?

उत्तर:
(i)
उन्हें सिखाया गया है कि ये बातें उनकी सेहत के लिए जरूरी है।

(ii) सेनों का कहना था कि खोखा आखिर अपने बाप का बेटा ठहरा।

(iii) औरत के पास एक बच्चा खड़ा था, जिसे वह रोकने की कोशिश कर रही थी।

(iv) मैंने मना किया तो लगा कहने जा-जा।

(v) कुर्सियाँ लॉन में लगवा दो, जब तक हम यहाँ बैठते हैं।

 

प्रश्न 4. वाक्य-भेद स्पष्ट कीजिए-

(क) इसके पहले कि पत्रकार महोदय कुछ जवाब देते, सेन साहब ने शुरू किया मैं तो खोखा को इंजीनियर बनाने जा रहा हूँ।

(ख) पत्रकार महोदय चुप मुस्कुराते रहे।

(ग) ठीक इसी वक्त मोटर के पीछे खट-खट की आवाज सुनकर सेन साहब लपके, शोफर भी दौड़ा। .

(घ) ड्राइवर, जरा दूसरे चक्कों को भी देख लो और पंप ले आकर हवा भर दो।

उत्तर:
(
क) मिश्र वाक्य

(ख) साधारण वाक्य

(ग) साधारण वाक्य

(घ) संयुक्त वाक्य।


गद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण-संबंधी प्रश्नोत्तर

1. लड़कियाँ तो पाँचों बड़ी सुशील हैं, पाँच-पाँच ठहरी और सो भी लड़कियाँ, तहजीब और तमीज की तो जीती-जागती मूरत ही हैं। मिस्टर और मिसेज सेन ने उन्हें क्या करना चाहिए, यह सिखाया हो या नहीं, क्या-क्या नहीं करना चाहिए, इसकी उन्हें ऐसी तालीम दी है कि बस। लड़कियाँ क्या हैं, कठपुतलियाँ हैं और उनके माता-पिता को इस बात का गर्व है। वे कभी किसी चीज को तोड़ती-फोड़ती नहीं। वे दौड़ती हैं, और खेलती भी हैं, लेकिन सिर्फ शाम के वक्त, और चूँकि उन्हें सिखाया गया है कि ये बातें उनकी सेहत के लिए जरूरी हैं। वे ऐसी मुस्कराहट अपने होठों पर ला सकती हैं कि सोसाइटी की तारिकाएँ भी उनसे कुछ सीखना चाहें, तो सीख लें, पर उन्हें खिलखिलाकर किलकारी मारते हुए किसी ने सुना नहीं। सेन परिवार के मुलाकाती रश्क के साथ अपने शरारती बच्चों से. खीझकर कहते हैं एक तुम लोग हो, और मिसेज सेन की लड़कियाँ हैं। अब, फूल का गमला तोड़ने के लिए बना है ? तुम लोगों के मारे घर में कुछ भी तो नहीं रह सकता।

 

प्रश्न:
(
क) प्रस्तुत गद्यांश किस पाठ से लिया गया है ? और इसके लेखक कौन हैं ?

(ख) सेन साहब अपनी पुत्रियों को कैसा मानते थे?

(ग) स्वास्थ्य लाभ के लिए पुत्रियों को क्या सिखाया गया है ?

(घ) सेन साहब के मुलाकाती लोग अपने शरारती बच्चों से खीझकर क्या कहते थे?

(ङ) लेखक ने सेन साहब की पुत्रियों की तुलना कठपुतलियों से क्यों की है ?

उत्तर:
(
क) प्रस्तुत गद्यांश विष के दाँत शीर्षक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक नलिन विलोचन शर्मा हैं।

(ख) सेन साहब को अपनी पुत्रियों पर पूरा भरोसा था। उनकी सोच थी कि उनकी बेटियाँ तहजीब और तमीज की जीती-जागती मूरत हैं। वे किसी भी चीज को तोड़ती-फोड़ती नहीं हैं।

(ग) स्वास्थ्य लाभ के लिए खेलना जरूरी है। खेलने से शरीर चुस्त-दुरूस्त रहता है किन्तु खेल की भी समय-सीमा निर्धारित थी। खेलना-कूदना और दौड़ना शाम में ही ठीक होता है। अतः, समय पालन का पूरा-पूरा निर्देश दिया गया था।

(घ) सेन साहब से मिलने के लिए प्रायः लोग आया-जाया करते थे। वे सेन साहब की पुत्रियों के रहन-सहन से काफी प्रभावित हो जाते थे। मंद मुस्कान, बोली में मिठास आदि उन पुत्रियों के गुण थे। किन्तु मिलनेवालों के बच्चे इन चीजों के विपरीत थे। कभी गमला तोड़ देना, आपस में उलझ जाना उनकी ये आदत बन गयी थीं। अत: उनकी लड़कियों पर रीझकर, अपने बेटे-बेटियों से कहते, एक तुम लोग हो और एक सेन साहब की लड़कियाँ जिनकी चाल-ढाल प्रशंसनीय है।

(ङ) कठपुतलियाँ निर्देशन के आधार पर चलती हैं। उठना, बैठना, चलना आदि सभी क्रियाएँ निर्देश पर ही होती हैं। ठीक उसी प्रकार सेन साहब की बेटियाँ भी निर्देश पर ही काम करती थीं। जोर-से नहीं हँसना, चीजों को नहीं तोड़ना, शाम में खेलना-कूदना आदि सभी काम वे कहने पर ही करती थीं। इसी कारण लेखक ने उन पुत्रियों की तुलना कठपुतलियों से की है।

 

2. खोखा नाउम्मीद बुढ़ापे की आँखों का तारा है यह नहीं कि मिसेज सेन अपना और बुढ़ाये का ताल्लुक किसी हालत में मानने को तैयार हों और सेन साहब तो सचमुच बूढ़े नहीं लगते, लेकिन मानने लगते कि बात छोड़िये। हकीकत तो यह है कि खोखा का आविर्भाव तब जाकर हुआ था, जब उसकी कोई उम्मीद दोनों को बाकी नहीं रह गयी थी। खोखा जीवन के नियम का अपवाद

था, और यह अस्वाभाविक नहीं था कि वह घर के नियमों का भी अपवाद हो।

प्रश्न

(क) पाठ और लेखक का नामोल्लेख करें।

(ख) लेखक ने नाउम्मीद बुढ़ापे की आँखों का तारा किसे कहा है और क्यों ?

(ग) खोखा घर के नियमों का अपवाद क्यों था?

उत्तर:

(क) पाठ-विष के दाँत, लेखकनलिन विलोचन शर्मा।

(ख) लेखक ने सेन दम्पत्ति के एक मात्र पुत्र खोखा को नाउम्मीद बुढ़ापे की आँखों का तारा कहा है। वस्तुतः सेन दम्पत्ति इस ढलती उम्र में, जब संतानोत्पत्ति की कोई आशा नहीं थी, खोखा. का जन्म हुआ था। इसलिये उसे आँखों का तारा अर्थात् अत्यन्त प्यारा कहा है।

(ग) खोखा ढलती उम्र में सेन दम्पत्ति का एक मात्र पुत्र था। अत: बहुत दुलारा था। घर का अनुशासन लड़कियों पर तो लागू था किन्तु खोखा पर किसी प्रकार की शक्ति नहीं थी। उसपर कोई पाबंदी न थी। इसलिये बहुत छूट थी।

 

3. एक दिन का वाकया है कि ड्राइंग रूम में सेन साहब के कुछ दोस्त बैठे गपशप कर . रहे थे। उनमें एक साहब साधारण हैसियत के अखबारनवीस थे और सेनों के दूर के रिश्तेदार भी होते थे। साथ में उनका लड़का भी था, जो था तो खोखा से भी छोटा, पर बड़ा समझदार और होनहार मालूम पड़ता था। किसी ने उसकी कोई हरकत देखकर उसकी कुछ तारीफ कर दी और उन साहब से पूछा कि बच्चा स्कूल तो जाता ही होगा? इसके पहले कि पत्रकार महोदय कुछ जवाब देते, सेन साहब ने शुरू किया-मैं तो खोखा को इंजीनियर बनाने जा रहा हूँ, और वे ही बातें दुहराकर वे थकते नहीं थे। पत्रकार महोदय चुप मुस्कुराते रहे। जब उनसे फिर पूछा गया कि अपने बच्चे के विषय में उनका क्या ख्याल है, तब उन्होंने कहा मैं चाहता हूँ कि वह जेंटिलमैन जरूर बने और जो कुछ बने, उसका काम है, उसे पूरी आजादी रहेगी। सेन साहब इस उत्तर के शिष्ट और प्रच्छन्न व्यंग्य पर ऐंठकर रह गए।

 

प्रश्न

(क) पाठ तथा उसके लेखक का नाम लिखें।

(ख) ड्राइंग रूम में कौन बैठे थे ?

(ग) समझदार लड़का कौन था ?

(घ) सेन साहब खोखा को क्या बनाना चाहते थे ?

(ङ) पत्रकार महोदय के उत्तर को सुनने के पश्चात् सेन साहब पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर:
(
क) पाठ का नाम-विष के दाँत

लेखक का नाम-नलिन विलोचन शर्मा।

(ख) ड्राइंग रूम में सेन साहब के कुछ दोस्त बैठे थे।

(ग) समझदार लड़का सेन साहब के रिश्तेदार पत्रकार महोदय का पुत्र था।

(घ) सेन साहब खोखा को इंजीनियर बनाना चाहते थे।

(ङ) पत्रकार महोदय के उत्तर पर सेन साहब ऐंठकर रह गए।

 

4. शाम के वक्त खेलता-कूदता खोखा बँगले के अहाते के बगल वाली गली में जा निकला। वहाँ धूल में मदन पड़ोसियों के आवारागर्द छोकरों के साथ लटू नचा रहा था। खोखा ने देखा तो उसकी तबीयत मचल गई। हंस कौओं की जमात में शामिल होने के लिए ललक गया, लेकिन आदत से लाचार उसने बड़े रोब के साथ मदन से कहा- हमको लट्टू दो, हम भी खेलेगा दूसरे लड़कों की कोई खास उम्र नहीं थी, वे खोखा को अपनी जमात में ले लेने के फायदों को नजर अंदाज नहीं कर सकते थे। पर उनके अपमानित प्रताड़ित, लीडर मन को यह बात कब मंजूर हो सकती थी। उसने छूटते ही जवाब दिया-अबे भाग जा यहाँ से ! बड़ा आया है लटू खेलने वाला। है भी लटू तेरे ! जा, अपने बाबा की मोटर पर बैठ।

 

प्रश्न

(क) पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।

(ख) खोखा शाम के खेलते हुए कहाँ चला गया ?

(ग) मदन क्या कर रहा था ?

(घ) लटू का खेल देखकर खोखा पर क्या प्रभाव पड़ा?

(ङ) मदन खोखा को खेल में भाग लेने क्यों नहीं दिया ?

उत्तर:
(
क) पाठ का नाम- विष के दाँत

लेखक का नाम नलिन विलोचन शर्मा।

(ख) खोखा शाम के वक्त खेलता-कूदता बँगले के अहाते की बगल वाली गली में चला गया।

(ग) मदन पड़ोसियों के आवारागर्द छोकरों के साथ लटू नचा रहा था।

(घ) लटू का खेल देखकर खोखा की तबीयत मचल गई। उसे खेलने की प्रबल इच्छा हुई।

(ङ) खोखा के व्यवहार ने मदन को आहत कर दिया था। उसके द्वारा प्रताड़ित होने के चलते वह खोखा को खेल में भाग लेने नहीं दिया।

 

5. मदन घर नहीं लौटा, लेकिन जाता ही कहाँ ? आठ-नौ बजे तक इधर-उधर मारा-मारा फिरता रहा। फिर भूख लगी, तो गली के दरवाजे से आहिस्ता-आहिस्ता घर में घुसा। उसके लिए मार खाना मामूली बात थी। डर था तो यही कि आज मार और दिनों से भी बुरी होगी, लेकिन उपाय ही क्या था! वह पहले रसोईघर में घुसा। माँ नहीं थी। बगल के सोनेवाले कमरे से बातचीत की आवाज आ रही थी। उसने इत्मीनान के साथ भर पेट खाना खाया, फिर दरवाजे के पास जाकर अन्दर की बातचीत सुनने की कोशिश करने लगा।

 

प्रश्न

(क) पाठ एवं लेखक का नाम लिखिए।

(ख) मदन देर रात तक घर क्यों लौट गया ?

(ग) मदन किस बात के लिए डरा हुआ था ?

(घ) घर पहुँचकर मदन ने सर्वप्रथम क्या किया ?

(ङ) खाना खाने के बाद मदन ने क्या किया ?

उत्तर:
(
क) पाठ का नाम-विष के दाँत।

लेखक का नाम-नलिन विलोचन शर्मा।

(ख) मदन देर रात तक घर लौट गया, क्योंकि इधर-उधर घूमते रहने के कारण उसे भूख लग चुकी थी।

(ग) मदन को डर था कि अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक मार खानी पड़ेगी।

(घ) घर पहुँचकर मदन ने सर्वप्रथम रसोईघर में घुसकर भर पेट खाना खाया।

(ङ) खाना खाने के उपरान्त मदन ने दरवाजे के पास जाकर अन्दर की बात सुनने की कोशिश करने लगा।

 

6.  चोर-गुंडा-डाकू होनेवाला. मदन भी कब माननेवाला था। वह झट काशू पर टूट पड़ा। दूसरे लड़के जरा हटकर इस द्वन्द्व युद्ध का मजा लेने लगे। लेकिन यह लड़ाई हड्डी और मांस की, बँगले के पिल्ले और गली के कुत्ते की लड़ाई थी। अहाते में यही लड़ाई हुई रहती, तो काशू शेर हो जाता। वहाँ से तो एक मिनट बाद ही वह रोता हुआ जान लेकर भाग निकला। महल और झोपड़ीवालों की लड़ाई में अक्सर महलवाले ही जीतते हैं, पर उसी हालत में, जब दूसरे झोपड़ीवाले उनकी मदद अपने ही खिलाफ करते हैं। लेकिन बच्चों को इतनी अक्ल कहाँ ? उन्होंने न तो अपने दुर्दमनीय लीडर की मदद की, न अपने माता-पिता के मालिक के लाडले की ही। हाँ, लड़ाई खत्म हो जाने पर तुरन्त ही सहमते हुए तितर-बितर हो गए।

 

प्रश्न

(क) मदन काशू को मारने के लिए क्यों टूट पड़ा?

(ख) यह लड़ाई हड्डी और मांस की, बँगले के पिल्ले और गली के कुत्ते की लड़ाई थी। इसका आशय स्पष्ट करें।

(ग) महल और झोपड़ीवालों की लड़ाई में महलवाले ही क्यों जीतते हैं ?

(घ) लड़ाई समाप्त होने पर क्या हुआ?

(ङ) मदन और काशू की लड़ाई में अन्य लड़के तमाशबीन क्यों बने रहे?

उत्तर:

(क) लट्टू खेलने के नाम पर मदन और काशू में आपसी विवाद उत्पन्न हो गया। काशू को अपने पिता और उनकी सम्पत्ति पर गर्व रहता था। इस कारण वह मदन को मार बैठा। मदन भी अल्हड़ और स्वाभिमानी प्रवृत्ति का था। अपनी पिटाई उसे नागवार लगी और वह काशू को मारने के लिए टूट पड़ा।

(ख) दो परस्पर असामान्य हैसियतों के बीच की लड़ाई अजीबोगरीब होती है। काशू अमीर बाप का बेटा था और मदन का बाप काशू के पिताजी का ही एक निम्न कोटि का कर्मचारी था। मदन और काशू में कभी भी प्रेम नहीं रहता था। दोनों में सर्प और नेवले की तरह संबंध था। गली का कुत्ता किसी तरह अपना पेट भरता है जबकि महल का कुत्ता स्वामी का स्नेही होता है उसे खाने के लिए विविध प्रकार की व्यवस्था रहती है।

(ग) झोपड़ीवाले महल के अत्याचार से भयभीत रहते हैं। उन्हें भय बना रहता है कि महल का विरोध करना अपने आपको मृत्यु के मुँह में झोकना है। महलों के दया-करम पर ही उनका जीवन निर्भर है। झोपड़ीवाले अपने साथी को मदद करने में हिचकते हैं। यही कारण है कि महलवाले हमेशा झोपड़ीवालों से जीत जाते हैं।

(घ) लड़ाई में जब काशू हार गया और रोता-बिलखता अपने घर में भाग गया तो अन्य लड़के भी वहाँ से तितर-बितर हो गये। उन्हें भय हो गया कि कहीं काशू के पिताजी आकर हमलोगों को मार बैठे।

(ङ) मदन और काशू की लड़ाई को देखनेवाले लड़कों के बाप काशू के पिताजी के यहाँ ही नौकरी करते थे। उन्हें लगा कि यहाँ मौन रह जाना ही समझदारी है। किसी को मदद करने का मतलब अपने ऊपर होनेवाले जुर्म को न्योता देना है। इसी कारण वे तमाशबीन बने रहे।

 

7. गिरधर निस्सहाय निष्ठुरता के साथ मदन की ओर बढ़ा। मदन ने अपने दाँत भींच लिए। गिरधर मदन के बिल्कुल पास आ गया कि अचानक ठिठक गया। उसके चेहरे से नाराजगी का बादल हट गया। उसने लपककर मंदन को हाथों से उठा लिया। मदन. हक्का-बक्का अपने पिता को देख रहा था। उसे याद नहीं, उसके पिता ने कब उसे इस तरह प्यार किया था, अगर कभी किया था, तो गिरधर उसी बेपरवाही, उल्लास और गर्व के साथ बोल उठा; जो किसी के लिए भी नौकरी से निकाले जाने पर ही मुमकिन हो सकता है, ‘शाबाश बेटे। एक तेरा बाप है, और तूने तो, खोखा के दो-दो दाँत तोड़ डाले। हा हा हा हा !

प्रश्न
(
क) पाठ और लेखक का नामोल्लेख करें।

(ख) गिरधर निष्ठुरता के साथ आगे बढ़कर क्यों ठिठक गया? (ग) मदन हक्का-बक्का क्यों हो गया ?

(घ) गिरधर ने बेटे मदन को शाबासी क्यों दी? मदन एकाएक गिरधर के लिए प्यारा क्यों बन गया ?

उत्तर:
(
क) पाठ-विष के दाँत। लेखक-नलिन विलोचन शर्मा।

(ख) गिरधर पहले तो गुस्से में मदन को मारने के लिए तत्पर हो गया किन्तु तत्काल ही उसे ख्याल आया कि अब तो वह सेन साहब का कर्मचारी है ही नहीं। फिर उनके लड़के के लिए अपने को क्यों मारे? यह सोचकर वह ठिठक गया।

(ग) मदन अक्सर अपने पिता से पिटता था। किन्तु जब पिता ने उसे अपने हाथों में प्यार से उठा लिया तो पिता के इस स्वभाव परिवर्तन पर वह हक्का-बक्का हो गया।

(घ) गिरधर सेन साहब का कर्मचारी था और अक्सर डाँट-फटकार सुनता था। इससे उसमें हीन-भावना घर कर गई थी। जब बेटे के कारण नौकरी से हटाया गया तो सेन साहब का भय समाप्त हो गया और उनके प्रति आक्रोश उभर आया। चूंकि उसके दमित आक्रोश को, उसके बेटे मदन ने सेन साहब के बेटे खोखा के दाँत को तोड़कर, व्यक्त कर दिया था, इसलिए मदन उसका प्यारा बन गया। जो काम गिरधर न कर सका था, उसके बेटे ने कर दिखाया।

 

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

सही विकल्प चुनें-

प्रश्न 1. विष के दाँत कहानी के रचयिता कौन हैं ?

(क) अमरकांत

(ख) विनोद कुमार शुक्ल

(ग) नलिन विलोचन शर्मा

(घ) यतीन्द्र मिश्रा

उत्तर:  (ग) नलिन विलोचन शर्मा

 

प्रश्न 2. खोखा का दूसरा नाम क्या था?

(क) मदन

(ख) गिरधर

(ग) काशू

(घ) आलो

उत्तर:  (ग) काशू

 

प्रश्न 3.मदन किसका पुत्र था?

(क) सेन साहब

(ख) गिरधर

(ग) शोफर

(घ) सिंह साहब

उत्तर:  (ख) गिरधर

 

प्रश्न 4. विष के दाँत कैसी कहानी है?

(क) सामाजिक

(ख) ऐतिहासिक

(ग) धार्मिक

(घ) मनोवैज्ञानिक

उत्तर:  (घ) मनोवैज्ञानिक

 

प्रश्न 5.विष के दाँत समाज के किस वर्ग की मानसिकता उजागर करती है ?

(क) उच्च वर्ग ।

(ख) निम्न वर्ग

(ग) मध्य वर्ग

(घ) निम्न-मध्य वर्ग

उत्तर:  (ग) मध्य वर्ग

 

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति

 

प्रश्न 1. खोखा नाउम्मीद ………. की आँखों का तारा है।

उत्तर: बुढ़ापे

 

प्रश्न 2. सेन साहब को देखकर औरत ……..” गई।

उत्तर: सहम

 

प्रश्न 3. मदन का ……. रुदन रुक गया था।

उत्तर: आत

 

प्रश्न 4. दूसरे लड़के जरा हटकर इस ……… युद्ध का मजा लेने लगे।

उत्तर: द्वन्द्व

 

प्रश्न 5. मदन के लिए ……” खाना मामूली बात थी।

उत्तर: मार

 

प्रश्न 6. गिरधर ने लपककर मदन को “……” से उठा लिया।

उत्तर: हाथों

 

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. सेन साहब को कितनी लड़कियाँ थीं ? उनके क्या नाम थे?

उत्तर: सेन साहब को सीमा, रजनी, आलो, शेफाली और आरती-ये पाँच लड़कियाँ थीं।

 

प्रश्न 2. सेन साहब की लड़कियाँ कठपुतलियाँ किस प्रकार थीं ?

अथवा, लेखक ने सेन साहब की लड़कियों को कठपुतलियाँ क्यों कहा है?

उत्तर: अपने माता-पिता (सेन-दम्पति) के आदेश का वे अक्षरशः पालन करती थीं तथा वही .. कार्य करती थीं जो उन्हें करने के लिए कहा जाता था।

 

प्रश्न 3. खोखा सेन दम्पति की नाउम्मीद बुढ़ापे की आँखों का तारा क्यों था?

उत्तर: खोखा सेन दम्पति के बुढ़ापे की संतान था। उसका जन्म ऐसे समय में हुआ था जब उसकी कोई उम्मीद उन दोनों को बाकी नहीं रह गई थी।

 

प्रश्न 4. सेन साहब अपने खोखा को क्या बनाना चाहते थे ?

उत्तर: सेन साहब अपने खोखा को इंजीनियर बनाना चाहते थे।

 

प्रश्न 5. गिरधर कौन था?

उत्तर: गिरधर सेन साहब की फैक्ट्री में किरानी था।

 

प्रश्न 6. मदन ड्राइवर के बीच विवाद क्यों हुआ?

उत्तर: ड्राइवर के मना करने पर भी मदन सेन साहब की कार को छू रहा था जो दोनों के बीच विवाद का कारण बना।

 

प्रश्न 7. सेन साहब ने मदन की माँ को क्या हिदायत दी ?

उत्तर: सेन साहब ने मदन की माँ को हिदायत दी कि मदन भविष्य में कार को छूना जैसी हरकत नहीं करे।

 

प्रश्न 8. काश और मदन की लड़ाई कैसी थी?

उत्तर: काशू और मदन की लड़ाई हड्डी और मांस की, बंगले के पिल्ले और गली के कुत्ते की लड़ाई थी।

 

प्रश्न 9. झोपड़ी और महल की लड़ाई में अक्सर कौन जीतता है ?

उत्तर: झोपड़ी और महल की लड़ाई में अक्सर महल वाले ही जीतते हैं।

 

प्रश्न 10. आलोचकों के अनुसार प्रयोगवाद का प्रारंभ किसकी कविताओं से हुआ था ?

उत्तर: आलोचकों के अनुसार प्रयोगवाद का आरंभ नलिन विलोचन शर्मा की कविताओं से हुआ।

 

विष के दाँत लिखक परिचय

 

नलिन विलोचन शर्मा का जन्म 18 फरवरी 1916 ई० में पटना के बदरघाट में हुआ । वे जन्मना भोजपुरी भाषी थे। वे दर्शन और संस्कृत के प्रख्यात विद्वान महामहोपाध्याय पं० रामावतार शर्मा के ज्येष्ठ पुत्र थे । माता का नाम रत्नावती शर्मा था। उनके व्यक्तित्व-निर्माण में पिता के पांडित्य के साथ उनकी प्रगतिशील दृष्टि की भी बड़ी भूमिका थी। उनकी स्कूल की पढ़ाई पटना कॉलेजिएट स्कूल से हुई और पटना विश्वविद्यालय से उन्होंने संस्कृत और हिंदी में एम० ए० किया। वे हरप्रसाद दास जैन कॉलेज, आरा, राँची विश्वविद्यालय और अंत में पटना विश्वविद्यालय में प्राध्यापक रहे । सन् 1959 में वे पटना विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष हुए और मृत्युपर्यंत (12 सितंबर 1961 ई०) इस पद पर बने रहे।

 

हिंदी कविता में प्रपद्यवाद के प्रवर्तक और नई शैली के आलोचक नलिन जी की रचनाएँ इस प्रकार हैं – ‘दृष्टिकोण, ‘साहित्य का इतिहास दर्शन, ‘मानदंड, ‘हिंदी उपन्यास विशेषतः प्रेमचंद, ‘साहित्य तत्त्व और आलोचनाआलोचनात्मक ग्रंथ; ‘विष के दाँत और सत्रह असंगृहीत पूर्व छोटी कहानियाँ कहानी संग्रह; केसरी कुमार तथा नरेश के साथ काव्य संग्रह – ‘नकेन के प्रपद्य और नकेन- दो, ‘सदल मिश्र ग्रंथावली, ‘अयोध्या प्रसाद खत्री स्मारक ग्रंथ, ‘संत परंपरा और साहित्य आदि संपादित ग्रंथ हैं।

 

आलोचकों के अनुसार, प्रयोगवाद का वास्तविक प्रारंभ नलिन विलोचन शर्मा की कविताओं से हुआ और उनकी कहानियों में मनोवैज्ञानिकता के तत्त्व समग्रता से उभरकर आए। आलोचना में वे आधुनिक शैली के समर्थक थे । वे कथ्य, शिल्प, भाषा आदि सभी स्तरों पर नवीनता के आग्रही लेखक थे। उनमें प्रायः परंपरागत दृष्टि एवं शैली का निषेध तथा आधुनिक दृष्टि का समर्थन है । आलोचना की उनकी भाषा गठी हुई और संकेतात्मक है । उन्होंने अनेक पुराने शब्दों को नया जीवन दिया, जो आधुनिक साहित्य में पुनः प्रतिष्ठित हुए ।

 

यह कहानी विष के दाँत तथा अन्य कहानियाँ नामक कहानी संग्रह से ली गई है। यह कहानी मध्यवर्ग के अनेक अंतर्विरोधों को उजागर करती है। कहानी का जैसा ठोस सामाजिक संदर्भ है, वैसा ही स्पष्ट मनोवैज्ञानिक आशय भी । आर्थिक कारणों से मध्यवर्ग के भीतर ही एक ओर सेन साहब जैसों की एक श्रेणी उभरती है जो अपनी महत्वाकांक्षा और सफेदपोशी के भीतर लिंग-भेद जैसे कुसंस्कार छिपाये हुए हैं तो दूसरी ओर गिरधर जैसे नौकरीपेशा निम्न मध्यवर्गीय व्यक्ति की श्रेणी है जो अनेक तरह की थोपी गयी बंदिशों के बीच भी अपने अस्तित्व को बहादुरी एवं साहस के साथ बचाये रखने के लिए संघर्षरत है । यह कहानी सामाजिक भेद-भाव, लिंग-भेद, आक्रामक स्वार्थ की छाया में पलते हुए प्यार-दुलार के कुपरिणामों को उभारती हुई सामाजिक समानता एवं मानवाधिकार की महत्त्वपूर्ण बानगी पेश करती है ।

 

विष के दाँत - पाठ का सारांश

विष के दाँत शीर्षक कहानी के लेखक श्री नलिन विलोचन शर्मा हैं। उन्होंने अपने लेख में । सामंती मिजाज के धनवान् परिवार और उसी पर आश्रित एक गरीब परिवार का चरित्र-चित्रण किया है। कहानी में सेन साहब और उनकी पत्नी को कड़े अनुशासन को पालन करने वाला दिखाया गया है। उनके परिवार में पाँच लड़की के बाद एक लड़का का जन्म होता है। लड़कियों के ऊपर अनुशासन की छड़ी बहुत कड़ी है जिससे लड़कियाँ मानो मिट्टी की मूर्ति बन चुकी है। उसी परिवार में लड़का सबसे छोटा है। सारा अनुशासन घर का नियम-व्यवस्था सब कुछ उसके लिए फे है। लाड़-प्यार में शरारती हो चुका है। अभी उम्र पाँच वर्ष का है लेकिन नौकर, बहन आदि पर हाथ चला देता है।

 

एक दिन संन साहब अपने दोस्तों के साथ ड्राइंग रूम में गपशप कर रहे थे। उनके एक पत्रकार मित्र भी थे। उसके साथ छोटा लड़का भी था जो काशू बाबू के उम्र का ही था। बात-चीत के क्रम में किसी ने उस लड़के के बारे में जानकारी चाही, बस सेन साहब अपने पुत्र खोखा के बारे में बोलने लगे। इसे इंजीनियर बनाना है। और बोलते ही चले गये। सेन साहब व्यवहार में परिवर्तन हो चुका था अपने पुत्र खोखा के लिए।

 

उन्हीं अहाते में गिरधर लाल रहता था। उसका छोटा लड़का मदन था जो खोखा के उम्र का था। एक दिन गाड़ी को गन्दा कर रहा था। रात में सेन साहब ने गिरधरलाल को बुलाकर काफी डाँटा। परिणामतः गिरधरलाल ने अपने बेटे मदन को खूब पीटा। रात में सोने वक्त सेनसाहब । मदन की रोने की आवाज सुनकर काफी खुश हुए।

 

अगले ही दिन काशू बाबू खेलने के लिए बगल के गली में चले गये। जहाँ मदन और अन्य लड़का लटू नचा रहा था। खोखा ने मदन से रौब में लटू माँगा। नहीं मिलने पर मदन पर चूंसा चला दिया। बदले में मदन ने भी घूसा चला दिया। और काशू बाबू के दो दाँत टूट गये। यानी विष के दाँत टूट गये।

 

शब्दार्थ

बरसाती : पोर्टिको

नाज : गर्व, गुमान

तहजीब : सभ्यता

शोफर : ड्राइवर

शामत : दुर्भाग्य

सख्त : कड़ा, कठोर

ताकीद : कोई बात जोर देकर कहना, चेतावनी

खोखा-खोखी : बच्चा-बच्ची (बाँग्ला)

फटकना : निकट आना

तमीज : विवेक, बुद्धि, शिष्टता

तालीम : शिक्षा

सोसाइटी : शिष्ट समाज, भद्रलोक

रश्क : इर्ष्या

ताल्लुक : संबंध

हकीकत : सच्चाई, वास्तविकता

आविर्भाव : उत्पत्ति, प्रकट होना

दुर्ललित : लाड़-प्यार में बिगड़ा हुआ

ट्रेंड : प्रशिक्षित

दूरदेशी : दूरदर्शिता, समझदारी

फरमाना : आग्रहपूर्वक कहना

फिजल : फालतू, व्यर्थ

वाकिफ : परिचित

वाकया : घटना

हेसियत : स्तर, प्रतिष्ठा, सामर्थ्य, औकात

अखबारनवीस : पत्रकार

प्रच्छन्न : छिपा हुआ, गुप्त, अप्रकट

अदब : शिष्टता, सभ्यता

हिकमत : कौशल, योग्यता

रासत : विदाई

बलौस : नि:स्वार्थ

बेयरा : खाना खिलाने वाला सेवक

चीत्कार : क्रंदन, आर्त होकर चीखना

शयनागार : शयनकक्ष, सोने का कमरा

खलल : विघ्न, बाधा, व्यवधान

कातर : आर्त

खेतयत : कुशलक्षेम

बेडब : बेतरीका, अनगढ़

उज्र : आपत्ति

मजाल : ताकत, हिम्मत, साहस

अक्ल : बुद्धि

दुर्दमनीय : मुश्किल से जिसका दमन किया जा सके

निष्ठुरता : क्रूर निर्ममता

The   End 

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