Page 585 Class 10 Hindi पाठ 10 – “मछली”
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गद्य खण्ड
10 – “मछली”
(विनोद कुमार शुक्ला)
बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी पाठ्यपुस्तक का दसवाँ
अध्याय ‘मछली’ एक संवेदनशील कहानी है जो
मानवीय भावनाओं और परिवार के संबंधों को दर्शाती है। यह कहानी दो भाइयों के मछली खरीदने
और उसे पालने की इच्छा के इर्द-गिर्द घूमती है। लेखक ने बच्चों की मासूमियत, उनकी जिज्ञासा, और जीवन के प्रति संवेदनशीलता
को बड़ी ही कुशलता से चित्रित किया है। साथ ही, कहानी में परिवार
के विभिन्न सदस्यों के व्यवहार और उनके बीच के तनाव को भी दिखाया गया है।
प्रश्न 1. झोले में मछलियाँ
लेकर बच्चे दौड़ते हुए पतली गली में क्यों घुस गए ?
उत्तर:- बच्चे पतली गली में इसलिए
घुसे क्योंकि वह रास्ता उनके घर तक जल्दी पहुँचने का छोटा रास्ता था। वे अपनी पकड़ी
हुई मछलियों को जल्द से जल्द घर ले जाना चाहते थे।
प्रश्न 2. मछलियों को लेकर
बच्चों की अभिलाषा क्या थी?
उत्तर:- बच्चे चाहते थे कि वे एक
मछली को पिताजी से मांगकर कुएँ में डाल दें। वे सोच रहे थे कि कुएँ में मछली बड़ी हो
जाएगी। जब उन्हें मन करेगा, वे मछली को बाल्टी से निकालकर
खेलेंगे और फिर वापस कुएँ में डाल देंगे।
प्रश्न 3. मछलियाँ लिए घर
आने के बाद बच्चों ने क्या किया?
उत्तर:- घर पहुँचकर बच्चे नहानघर
में गए। वहाँ उन्होंने एक भरी हुई बाल्टी को आधा खाली किया। फिर उन्होंने अपने झोले
से तीनों मछलियों को उस बाल्टी में डाल दिया।
प्रश्न 4. मछली को छूते हुए
संतू क्यों हिचक रहा था?
उत्तर:- संतू को मछली छूने में डर
लग रहा था। उसे लगता था कि कहीं मछली उसे काट न ले। इसलिए वह मछली को छूने में हिचकिचा
रहा था।
प्रश्न 5. मछली के बारे में
दीदी ने क्या जानकारी दी थी? बच्चों
ने उसकी परख कैसे की?
उत्तर:- दीदी ने बताया था कि मरी
हुई मछली की आँख में अपनी परछाईं नहीं दिखती। बच्चों ने एक मरी हुई मछली की आँख में
देखा। जब उन्हें अपनी परछाईं दिखाई दी, तो वे समझ गए कि मछली
अभी जिंदा है।
प्रश्न 6. संतू क्यों उदास
हो गया ?
उत्तर:- संतू इसलिए उदास हो गया क्योंकि
उसे पता चला कि मछली को काटा जाएगा। वह मछली को जिंदा रखना चाहता था और उसे पालना चाहता
था। मछली से बिछड़ने का विचार उसे दुखी कर रहा था।
प्रश्न 7. घर में मछली कौन
खाता था और वह कैसे बनायी जाती थी?
उत्तर:- घर में केवल पिताजी मछली
खाते थे। मछली को नौकर काटता था। वह पहले मछली को पत्थर पर पटककर मारता था। फिर उसे
राख से रगड़ता था। उसके बाद एक विशेष पाटे पर रखकर चाकू से काटता था। यह सब नहानघर
में होता था।
प्रश्न 8. दीदी कहाँ थी और
क्या कर रही थी?
उत्तर:- दीदी अपने कमरे में थी। वह
सो रही थी।
प्रश्न 9. अरे-अरे कहता हुआ
भग्गू किसके पीछे भागा और क्यों ?
उत्तर:- भग्गू संतू के पीछे भागा।
संतू एक मछली लेकर भाग रहा था। भग्गू को डर था कि संतू मछली को कुएँ में डाल देगा।
वह नहीं चाहता था कि इसके लिए उसे डाँट पड़े। इसलिए वह संतू से मछली लेने के लिए उसके
पीछे भागा।
प्रश्न 10. मछली और दीदी में
क्या समानता दिखाई पड़ी? स्पष्ट करें।
उत्तर:- मछली और दीदी दोनों परेशान
दिखाई दे रहे थे। मछली पानी के बिना तड़प रही थी और अंगोछे में लिपटी हुई थी। दीदी
भी अपने कमरे में रो रही थी और साड़ी से ढकी हुई थी। मछली तड़प रही थी और दीदी हिचकी
ले रही थी। दोनों की हालत दयनीय थी।
प्रश्न 11. पिताजी किससे नाराज
थे और क्यों ?
उत्तर:- पिताजी नरेन से नाराज थे।
वे इसलिए नाराज थे क्योंकि बच्चों ने मछलियों के कारण घर में उथल-पुथल मचा दी थी। बच्चे
मछली को पालना चाहते थे और उसे कटने से बचाना चाहते थे। इस कारण संतू एक मछली लेकर
भाग गया और भग्गू को उसके पीछे भागना पड़ा। यह सब देखकर पिताजी परेशान हो गए।
प्रश्न 12. सप्रसंग व्याख्या
करें
(क)बरसते पानी में खड़े होकर
झोले का मुँह आकाश की तरफ फैलाकर मैंने खोल दिया ताकि आकाश।
व्याख्या- यह पंक्ति ‘मछली’ कहानी से है। बच्चे पिताजी
द्वारा खरीदी गई मछलियों को घर ले जा रहे थे। वे मछलियों को जीवित रखना चाहते थे। बारिश
हो रही थी, इसलिए उन्होंने झोले का मुँह
आकाश की ओर खोल दिया। उनका उद्देश्य था कि बारिश का पानी झोले में जाए और मछलियाँ जीवित
रहें। यह बच्चों की मछलियों के प्रति दया और प्रेम को दर्शाता है।
(ख) अगर बाल्टी भरी होती तो
मछली उछलकर नीचे आ जाती।
व्याख्या- यह वाक्य बच्चों द्वारा मछलियों
को संभालने की कोशिश को दर्शाता है। वे मछलियों को आधी भरी बाल्टी में रखते हैं। लेखक
सोचता है कि पूरी भरी बाल्टी में मछलियाँ उछलकर बाहर आ सकती थीं। यह बच्चों की सावधानी
और मछलियों को सुरक्षित रखने की इच्छा को दिखाता है। वे नहीं चाहते कि मछलियाँ किसी
तरह से खो जाएँ या भाग जाएँ।
(ग) और पास से देख। परछाई दिखती
है?
व्याख्या- यह पंक्ति दीदी द्वारा बताई
गई बात से जुड़ी है। दीदी ने कहा था कि मृत मछली की आँखों में परछाईं नहीं दिखती। लेखक
अपने भाई संतू से मछली की आँखों में देखने को कहता है। वे जानना चाहते हैं कि क्या
मछली जीवित है। यह बच्चों की जिज्ञासा और दीदी की बात को परखने की कोशिश दिखाता है।
(घ) नहानघर की नाली क्षणभर
के लिए पूरी भर गई, फिर बिल्कुल खाली हो गयी।
व्याख्या- यह वाक्य नहानघर में मछली
काटने और धोने की प्रक्रिया को दर्शाता है। भग्गू मछलियों को साफ कर रहा था। जब पानी
से भरी बाल्टी उड़ेली गई, तो नाली क्षणभर के लिए भर
गई और फिर खाली हो गई। यह घर में मछली पकाने की तैयारी और उससे फैली गंध का वर्णन करता
है।
प्रश्न 13. संतू के विरोध का
क्या अभिप्राय है?
उत्तर:- संतू का विरोध मानवीय संवेदनाओं
का प्रतीक है। वह मछलियों के प्रति दया और करुणा दिखाता है। जब भग्गू मछलियों को काटता
है, तो संतू उन्हें बचाने की कोशिश
करता है। यह कार्य निर्बल और असहाय प्राणियों के प्रति संवेदनशीलता दर्शाता है। संतू
का व्यवहार यह संदेश देता है कि हमें सभी जीवों के प्रति दयालु होना चाहिए और उनकी
रक्षा करनी चाहिए। उसका विरोध समाज में व्याप्त निर्दयता और स्वार्थपरता के खिलाफ एक
आवाज है।
प्रश्न 14. दीदी का चरित्र
चित्रण करें।
उत्तर:- दीदी एक संवेदनशील और परिपक्व
युवती है। वह अपने परिवार की परंपराओं में बंधी है, लेकिन उसकी सोच प्रगतिशील है। अपने छोटे भाइयों के प्रति उसका
स्नेह और मार्गदर्शन स्पष्ट दिखाई देता है। वह उन्हें जीवन के महत्वपूर्ण सबक सिखाती
है, जैसे हर प्राणी में अपनी परछाईं
देखना। दीदी की संवेदनशीलता मछलियों के प्रति उसकी सहानुभूति में झलकती है। वह समाज
की रूढ़िवादिता के बीच अपनी भावनाओं को दबाए रखती है, जो उसके चरित्र की जटिलता
को दर्शाता है।
प्रश्न 15. कहानी के शीर्षक
की सार्थकता स्पष्ट करें।
उत्तर:- ‘मछली’ शीर्षक इस कहानी के लिए अत्यंत
उपयुक्त है। मछली कहानी का केंद्रीय विषय है और प्रतीकात्मक महत्व रखती है। वह जीवन
की नश्वरता और असहाय प्राणियों की दशा का प्रतीक है। कहानी में मछली के माध्यम से मानवीय
संवेदनाओं, बाल मनोविज्ञान और सामाजिक
यथार्थ को दर्शाया गया है। मछली की स्थिति से दीदी की तुलना कहानी के अंत में शीर्षक
की सार्थकता को और भी पुष्ट करती है। इस प्रकार, ‘मछली’ शीर्षक कहानी के मूल
भाव और संदेश को सटीक रूप से व्यक्त करता है।
प्रश्न 16. कहानी का सारांश
प्रस्तुत करें।
उत्तर:- मछली’ कहानी एक मध्यमवर्गीय परिवार
की है। कहानी का नायक और उसका भाई संतू पिता द्वारा लाई गई मछलियों को बचाने की कोशिश
करते हैं। वे मछलियों को कुएँ में डालना चाहते हैं, लेकिन उनकी योजना असफल होती है। दीदी उन्हें जीवन के महत्वपूर्ण
सबक सिखाती है। भग्गू द्वारा मछलियों को काटे जाने पर संतू विरोध करता है। कहानी बच्चों
की मासूमियत, संवेदनशीलता और प्रकृति के
प्रति प्रेम को दर्शाती है। साथ ही, यह समाज में व्याप्त
निर्दयता और स्वार्थपरता पर भी प्रकाश डालती है। अंत में, दीदी की तुलना मछली से की
जाती है, जो कहानी के मूल संदेश को
रेखांकित करती है।
भाषा की
बात
प्रश्न 1. निम्नांकित विशेष्य
पदों में उपयुक्त विशेषण या क्रियाविशेषण लगाएँ
उत्तर:-
गली – पतली गली
मछली – तीन मछलियाँ, कोई मछली।
उछली – जोर से उछली।
कमीज – गीली कमीज।
मूंछे – छल्लेदार मूंछे।
परछाई – अपनी परछाईं।
नहानघर – मछलियाँ नहानघर।
खंगाला – गोल-गोल खंगाला।
प्रश्न 2. पाठ में प्रयुक्त
विभिन्न क्रियारूपों को एकत्र कीजिए।
उत्तर:- घुस गए, पड़ता था, घूटते-घूटते बचा। उछलकर, आदि।
प्रश्न 3. निम्नांकित वाक्यों
के पद-विग्रह करें
(क) मुर्दा सी मछली के पूरे
शरीर में अच्छी तरह राख मली।
उत्तर:-
मुर्दा – गुणवाचक विशेषण, स्त्रीलिंग, एकवचन
मछली – जातिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्त्ताकारक।
अच्छी – गुणवाचक विशेषण स्त्रीलिंग, एकवचन।
मली – सकर्मक क्रिया, स्त्रीलिंग, एकवचन, भूतकाल।
(ख) पाटे के समय
मछलियों के गोल-गोल चमकीले पंख पड़े थे।
उत्तर:-
मछलियों – जातिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, बहुवचन संबंध कारक।
चमकीले – गुणवाचक विशेषण, बहुवचन, पुल्लिंग।
गद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण-संबंधी
प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
दौड़ते हुए हम लोग एक पतली
गली में घुस गए। इस गली से घर नजदीक पड़ता था। दूसरे रास्तों में बहुत भीड़ थी। बाजार
का दिन था। लेकिन बूंदें पड़ने से भीड़ के बिखराव में तेजी आ गई थी। दौड़ इसलिए रहे
थे कि डर लगता था कि मछलियाँ बिना पानी के झोले में ही न मर जाएँ। झोले में तीन मछलियाँ
थीं। एक तो उसी वक्त मर गई थी जब पिताजी खरीद रहे थे। दो जिन्दा थीं। झोले में उनकी
तड़प के झटके मैं जब तब महसूस करता था। मन ही मन सोच रहा था कि एक मछली पिताजी से जरूर
माँग लगेंगे। फिर उसे कुएँ में डालकर बहुत बड़ी करेंगे। जब मन होगा बाल्टी से निकालकर
खेलेंगे। बाद में फिर कुएँ में डाल देंगे।
प्रश्न
(क) प्रस्तुत गद्यांश
किस पाठ से लिया गया है? और इसके लेखक कौन
हैं ?
(ख) बच्चों ने गली
का रास्ता क्यों पकड़ लिया?
(ग) बच्चों की कौन-सी
उत्कंठा थी?
(घ) झोले में कितनी
मछलियाँ थीं?
उत्तर:-
(क) प्रस्तुत गद्यांश मछली
शीर्षक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक विनोद कुमार शुक्ल हैं।
(ख) बाजार का दिन होने और हल्की
वर्षा होने के कारण दूसरे रास्तों में काफी भीड़ थी। गली से घर नजदीक पड़ता था। घर
जल्दी पहुंचने के उद्देश्य से बच्चों ने गली का रास्ता पकड़ लिया।
(ग) बाजार से तीन मछलियाँ खरीदी
गई थीं। एक मछली को वे पिताजी से मांग कर कुआँ – में डालना चाहते थे। कुआँ में डालकर वे मछली के साथ खेलना चाहते
थे।
(घ) झोले में तीन मछलियाँ थीं।
2. नहानघर का दरवाजा अंदर से
हम लोगों ने बंद कर लिया था। भरी हुई बाल्टी थी, उसे आधी खाली कर मैंने झोले की तीनों मछलियाँ उड़ेल दीं। अगर
बाल्टी भरी होती तो मछली नाली में घुस गई थी। हाथों से मैंने और सन्तू ने टटोल-टटोलकर
ढूँढा था। जब दिखी नहीं तो हम घर के पीछे जाकर खड़े हो गए थे जहाँ घर की नाली एक बड़ी
नाली से मिलती थी। गंदे पानी में मछली दिखी नहीं। दीदी ने बताया था कि वह मछली इस नाली
से शहर की सबसे बड़ी नाली में जाएगी फिर शहर से तीन मील दूर मोहरा नदी में चली जाएगी।
प्रश्न
(क) बच्चों ने मछलियों
का क्या किया?
(ख) नहानघर की नाली
में गिरी हुई मछली के बारे में दीदी ने क्या बताया था ?
(ग) मछली नाली में
कैसे चली गई थी?
(घ) मोहरा नदी शहर
से कितनी दूर पर बहती है ?
उत्तर:-
(क)बच्चों ने मछलियों को आधे
जल से भरी हुई बाल्टी में डाल दिया।
(ख) दीदी ने बताया था कि वह
मछली इस नाली से शहर की सबसे बड़ी नाली में जाएगी और शहर से तीन मील दूर मोहरा नदी
में चली जाएगी।
(ग) लेखक के हाथ से छूटकर मछली
नाली में चली गई थी।
(घ) मोहरा नदी शहर से तीन मील
की दूरी पर बहती है।
3. गीले कपड़ों में देखकर दीदी
बहुत नाराज हुई। फिर प्यार से समझाया। संतू को दीदी ने खुद अपने हाथों से जानें क्यों
अच्छे-अच्छे कपड़े पहनाएँ। मैं घर के धोए कपड़े पहन रहा था तो दीदी ने कहा कि धोबी
के धुले कपड़े पहन लें। फिर दीदी ने पेटी से मेरे लिए कपड़े निकाल – दिए। संतू के बड़े-बड़े बाल
थे इसलिए अभी तक गीले थे। दीदी ने संतू के बालों को टॉवेल से पोंछकर उसके बाल संवार
दिए।
प्रश्न
(क) दीदी क्यों नाराज
हुयी?
(ख) दीदी ने क्या
किया ?.
(ग) उल्लिखित गद्यांश
के आधार पर तर्क सहित बताएं कि दीदी का स्वभाव कैसा था?
उत्तर:-
(क) भाइयों को गीले कपड़ों
में देखकर दीदी बहुत नाराज हुई।
(ख)अपनी नाराजगी जाहिर करने
के बाद दीदी ने भाइयों को प्यार से समझाया। संतू को खुद अच्छे-अच्छे कपड़े पहनाए। फिर
टॉवेल से उसके बाल सुखाकर उसके बाल झाड़े। नरेन को धोबी के साफ किए कपड़े पहनने को
कहा।
(ग) दीदी ममतामयी थी। भाइयों
से बहुत स्नेह करती थी यही कारण है कि गोले कपड़ों में भाइयों पर नाराज हुई। फिर प्यार
से समझाया। संतू के कपड़े बदलवाए उसके बाल सँवारे और नरेन को धोबी के धुले कपड़े पहनने
के लिए निकाल कर दिए। .
4. तीनों मछलियों के कई टुकड़े
हो गए थे। पाटे के पास मछलियों के गोल-गोल चमकीले पंख पड़े थें। दीदी जहाँ लेटी थी, उस समय कमरे का दरवाजा खुला
था। शायद माँ अन्दर थीं। पिताजी दरवाजे के पास गुस्से से टहल रहे थे। दीदी की सिसकियाँ
बढ़ गई थी। मुझे लगा कि पिताजी ने दीदी को मारा है।
प्रश्न
(क) मछलियों के टुकड़े
होने का निहितार्थ क्या है ?
(ख) दीदी की सिसकियाँ
क्यों बढ़ गई थीं?
(ग) पिताजी का दीदी
को मारना क्या प्रदर्शित करता है ?
उत्तर:-
(क) मछलियों के टुकड़े होने
का निहितार्थ है कोमल भावनाओं का नष्ट होना।
(ख) दीदी को पिताजी ने मारा
था, इसलिए उनकी सिसकियाँ बढ़ गई
थीं।
(ग) पिताजी द्वारा दीदी. को
मारना दोहरी मानसिकता का प्रतीक है जिसमें बेटा-बेटी में फर्क और निर्भर परनिर्भर में
भेद स्पष्ट होता है।
5. घर में मछली काटने के लिए
एक अलग से पाटा था। उस पाटे के ऊपर ही मछली रखकर काटी जाती थी। पाटे में चक्कू के आड़े-तिरछे
निशान बन गए थे। यह पाटा परछी में ड्रम के पीछे रखा रहता था। जिस रोज मछली बनती थी
उसी रोज यह पाटा निकाला जाता था। घर का नौकर मछली काटा करता था। पानी का गिरना बिल्कुल
बंद हो गया था। आँगन में आकर मैंने देखा जिस जगह मछली काटी जाती थी वहाँ वही पाटा धुला
हुआ रखा था। पास में थोड़ी चूल्हे की राख थी। मैंने सोचा भग्गू कुआँ के पास चक्कू में
धार कर रहा होगा। नहानघर का दरवाजा पूरा खुला था। मुझे बाल्टी दिख रही थी जिसमें मछलियाँ
थीं। माँ वहाँ नहीं थी। शायद ऊपर होगी। माँ को घर में मछली, गोश्त बनना अच्छा नहीं लगता
था। पिताजी ने कई बार चाहा किं हम लोग भी मछली, गोश्त खाया करें, लेकिन माँ ने सख्ती से मना
कर दिया था। और, किसी को अच्छा भी नहीं लगता
था, केवल पिताजी खाते थे।
प्रश्न
(क) पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।
(ख) घर में मछली काटने का साधन
क्या था?
(ग) घर में मछली कौन काटता
था?
(घ) माँ को क्या अच्छा नहीं
लगता था?
(ङ) घर में मछली कौन खाते थे?
उत्तर:-
(क) पाठ का सारांश-मछली।
लेखक का नाम-विनोद कुमार शुक्ला
(ख) घर में मछली काटने के लिए
एक अलग से पाटा था।
(ग) घर का नौकर मछली काटता
था।
(घ) मछली, गोश्त बनाना माँ को अच्छा
नहीं लगता था।
(ङ) घर में केवल पिताजी मछली
खाते थे।
6. भग्गू को जैसे मालूम था कि
मछलियाँ नहानघर में हैं। आते ही वह अंगोछे में तीनों मछलियाँ निकाल लाया। कुएँ में
मछली पालने का उत्साह.बुझ-सा गया था। पिताजी शायद अभी तक आए नहीं थे। कमरे में जाकर
देखा तो सच में दीदी करवट लिए लेटी थी। संतू को मैंने इशारे से बुलाया कि वह भी गीले
कपड़े बदल ले। शायद कुछ आहट हुई होगी। दीदी ने पलटकर हमें देखा। गीले कपड़ों में देखकर
दीदी बहुत नाराज हुई। फिर प्यार से समझाया। संतू को दीदी ने खुद अपने हाथों से न जाने
क्यों बहुत अच्छे-अच्छे कपड़े पहनाए। मैं घर के धोए कपड़े पहन रहा था तो दीदी ने कहा
कि धोबी के धुले कपड़े पहन लूँ। फिर दीदी ने पेटी से मेरे लिए कपड़े निकाल दिए। संतू
के बड़े-बड़े बाल थे, इसलिए अभी तक गीले थे। दीदी
ने संतू के बातों को टॉवेल से पोंछकर, उनमें तेल लगाया।
बाएँ हाथ से संतू की ठुड्डी पकड़कर दीदी ने उसके बाल सँवार दिए। जब दीदी संतू के बाल
संवार रही थी तो संतू अपनी बड़ी-बड़ी आँखों से दीदी को टकटकी बाँधे देख रहा था। सभी
कहते थे कि दीदी बहुत सुन्दर है।
प्रश्न
(क) पाठ तथा लेखक
का नाम लिखें।
(ख) भग्ग को क्या
मालूम था और उसने आते ही क्या किया?
(ग) कमरे में कौन
थी?
(घ) दीदी क्यों नाराज
हुई?
(ङ) दीदी ने संतू
के लिए क्या किया?
उत्तर:-
(क) पाठ का नाम मछली
लेखक का नाम-विनोद कुमार शुक्ला
(ख) भग्गू को जैसे मालूम था
कि मछलियाँ नहानघर में हैं। आते ही वह अंगोछे में तीनों मछलियाँ निकाल लाया।
(ग) कमरे में दीदी करवट लिए
लेटी थी।
(घ) बच्चों को गीले कपड़ों
में देखकर दीदी बहुत नाराज हुई।
(ङ) दीदी ने संतू को अपने हाथों
से अच्छे-अच्छे कपड़े पहनाए एवं उसके बाल संवारे।
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प्रश्न 1.‘मछली’ किस कहानीकार की
रचना है ?
(क) नलिन विलोचन शर्मा
(ख) प्रेमचंद
(ग) अज्ञेय
(घ) विनोद कुमार शुक्ल
उत्तर:- (घ) विनोद कुमार शुक्ल
प्रश्न 2.‘मछली’ किस प्रकार की कहानी
है ?
(क) सामाजिक
(ख) मनोवैज्ञानिक
(ग) ऐतिहासिक
(घ) वैज्ञानिक
उत्तर:- (क) सामाजिक
प्रश्न 3.‘महाविद्यालय’ पुस्तक से कौन-सी
रचना संकलित है ?
(क) विष के दाँत
(ख) मछली
(ग) नौबतखाने में इबादत
(घ) शिक्षा और संस्कृति
उत्तर:- (ख) मछली
प्रश्न 4.‘मछली’ कहानी में किस वर्ग
का जीवन वर्णित है ?
(क) उच्च वर्ग
(ख) मध्यम वर्ग
(ग) निम्न वर्ग
(घ) मजदूर वर्ग
उत्तर:- (ख) मध्यम वर्ग
प्रश्न 5. संत-नरेन आपस में
कौन हैं ?
(क) भाई-भाई
(ख) चाचा-भतीजा
(ग) भाई-बहन
(घ) जीजा-साला
उत्तर:- (क) भाई-भाई
प्रश्न 6. विनोद कुमार शुक्ल
कहानीकार उपन्यासकार के अलावा और क्या है ?
(क) कवि
(ख) नाटककार
(ग) आलोचक
(घ) राजनेता
उत्तर:- (घ) राजनेता
II. रिक्त स्थानों की
पूर्ति
प्रश्न 1. अब जोर से ……….. गिरने लगा था।
उत्तर:- पानी
प्रश्न 2. संतू ……….. से काँप रहा था।
उत्तर:- ठंड
प्रश्न 3. घर का नौकर ……… काटा करता था।
उत्तर:- मछली
प्रश्न 4. हिचकी लेते ही दीदी का पूरा
शरीर ……… उठता था।
उत्तर:- सिहर
प्रश्न 5. नहानघर में जाकर उसे लगा कि
……….. गंध आ रही है।
उत्तर:- मछलियों की
अतिलघु उत्तरीय
प्रश्न
प्रश्न 1. झोले में मछली लेकर
दौड़ते हुए लड़कों ने झोले का मुँह क्यों खोल दिया? ..
उत्तर:- लड़कों ने झोले का मुँह इसलिए
खोल दिया ताकि वर्षा का जल मछलियों को जीवित रखने में झोले के अन्दर आ सके।
प्रश्न 2. संतु मछली को क्यों
नहीं छूना चाहता था?
उत्तर:- संतू मछली को इसलिए नहीं
छूना चाहता था क्योंकि वह छूने से डरता था।
प्रश्न 3. नरेन ने बाल्टी
में क्यों हाथ डाला?
उत्तर:- नरेन ने बाल्टी में हाथ डालकर
मुर्दा सी पड़ी मछली को बाहर निकालकर फर्श पर डाल दिया।
प्रश्न 4. कमरे से दीदी की
हल्की सिसकियों की आवाज क्यों आ रही थी?
उत्तर:- दीदी की सिसकियों की आवाज
कमरे से इसलिए आ रही थी क्योंकि उसके पिताजी ने उसको पीटा था।
प्रश्न 5. पिता जी ने दहाड़
क्यों मारा और क्या कहा?
उत्तर:- पिताजी ने सन्तू पर क्रोधित
होकर दहाड़ मारा तथा भग्गू से उसके हाथ-पैर तोड़ देने के लिए कहा।
प्रश्न 6. बच्चों ने मछलियों
का क्या किया?
उत्तर:- बच्चों ने मछलियों को आधे
जल से भरी हुई बाल्टी में डाल दिया।
प्रश्न 7. मछली नाली में कैसे
चली गई ?
उत्तर:- नरेन (लेखक) के हाथ से छूटकर
मछली नाली में चली गई।
प्रश्न 8. दीदी क्यों नाराज
हुई?
उत्तर:- भाइयों को गीले कपड़ों में
देखकर दीदी बहुत नाराज हुई।
प्रश्न 9. मछलियों के टुकड़े
होने का निहितार्थ क्या है ?
उत्तर:- मछलियों के टुकड़े होने का
निहितार्थ है कोमल भावना का विनष्ट होना।
प्रश्न 10. झोले में मछलियां
लेकर बच्चे दौड़ते हुए पतली गली में क्यों घुस गए ?
उत्तर:- झोले में मछलियाँ लेकर बच्चे
दौड़ते हुए पतली गली में घुस गए,
क्योंकि इस गली में
घर नजदीक पड़ता था। दूसरे रास्तों में बहुन भीड़ थी।
प्रश्न 11. मछलियों को लेकर
बच्चों की अभिलाषा क्या थी?
उत्तर:- मछलियों को लेकर बच्चों के
मन में अभिलाषा थी कि एक मछली पिताजी से माँगकर उसे कुएँ में डालकर बहुत बड़ी करेंगे।
प्रश्न 12. मछलियाँ लिए घर
आने के बाद बच्चों ने क्या किया ?
उत्तर:- मछलियाँ घर लाने के बाद बच्चों
ने नहानघर में भरी हुई बाल्टी को आधी करके उसमें . मछलियों को रख दिया।
प्रश्न 13. मछली को छूते हुए
संतु क्यों हिचक रहा था ?
उत्तर:- संतू मछलियों को छूते हुए
हिचक रहा था, क्योंकि उसे डर था कि मछली
काट लेगी।
प्रश्न 14. दीदी कहाँ थी और
क्या कर रही थी?
उत्तर:- दीदी घर के एक कमरे में थी।
वह लेटी हुई थी और सिसक-सिसककर रो रही थी। . वह बार-बार हिचकी ले रही थी जिससे उसका
शरीर सिहर उठता था।
मछली लेखक
परिचय
विनोद कुमार शुक्ल का जन्म
1 जनवरी 1937 ई० में राजनांदगाँव, छत्तीसगढ़ में हुआ । । उन्होंने
वृत्ति के रूप में प्राध्यापन को अपनाया । वे इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय में
एसोसिएट . प्रोफेसर थे । वे दो वर्षों (1994-1996 ई०) तक निराला सृजनपीठ में अतिथि साहित्यकार भी रहे । उनका पहला कविता संग्रह
‘लगभग जयहिंद’ पहचान सीरीज के अंतर्गत 1971 में प्रकाशित हुआ। उनके अन्य
कविता संग्रह हैं – ‘वह आदमी नया गरम कोट पहिनकर
चला गया विचार की तरह’, ‘सबकुछ होना बचा रहेगा’ और ‘अतिरिक्त नहीं । उनके तीन
उपन्यास – ‘नौकर की कमीज’, ‘खिलेगा तो देखेंगे’ और ‘दीवार में एक खिडकी रहती थी’ तथा दो कहानी संग्रह – ‘पेड़ पर कमरा’ और ‘महाविद्यालय’ भी प्रकाशित हो चुके हैं।
उनके उपन्यासों का कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। इतालवी भाषा में उनकी कविताओं
एवं एक कहानी संग्रह ‘पेड़ पर कमरा’ का अनुवाद हुआ है । ‘नौकर की कमीज’ उपन्यास पर मणि कौल द्वारा
फिल्म का भी निर्माण हुआ है । विनोद कुमार शुक्ल को 1992 ई० में रघुवीर सहाय स्मृति
पुरस्कार, 1997 ई० में दयावती मोदी कवि शेखर
सम्मान और 1990 ई० में साहित्य अकादमी पुरस्कार
प्राप्त हो चुके हैं।
बीसवीं शती के सातवें-आठवें
दशक में विनोद कुमार शुक्ल एक कवि के रूप में सामने आए थे। कुछ ही समय बाद उसी दौर
में उनकी दो-एक कहानियाँ भी सामने आई थीं । धारा और प्रवाह से बिल्कुल अलग, देखने में सरल किंतु बनावट
में जटिल अपने न्यारेपन के कारण . उन्होंने सुधीजन का ध्यान आकृष्ट किया था । यह खूबी
भाषा या तकनीक पर निर्भर नहीं थी। इसकी जड़ें संवेदना और अनुभूति में थीं और यह भीतर
से पैदा हुई खासियत थी । तब से लेकर आज तक वह अद्वितीय मौलिकता अधिक स्फुट, विपुल और बहुमुखी होकर उनकी
कविता, उपन्यास और कहानियों में उजागर
होती आयी है।।
प्रस्तुत कहानी कहानियों के
उनके संकलन ‘महाविद्यालय’ से ली गयी है । कहानी बचपन
की स्मृति के भाषा-शिल्प में रची गयी है और इसमें एक किशोर की वयःसंधिकालीन स्मृतियाँ, दृष्टिकोण और समस्याएँ हैं
। कहानी एक छोटे शहर के निम्न मध्यवर्गीय परिवार के भीतर के वातावरण, जीवन यथार्थ और संबंधों को
आलोकित करती हुई लिंग-भेद की समस्या को भी स्पर्श करती है। घटनाएँ, जीवन प्रसंग आदि के विवरण
एक बच्चे की आँखों देखे हुए और उसी के मितकथन से उपजी सादी भाषा में हैं । कहानी का
समन्वित प्रभाव गहरा और संवेदनात्मक है। कहानी अपनी प्रतीकात्मकता के कारण मन पर एक
स्थायी प्रभाव छोड़ती है।
मछली - पाठ का सारांश
दौड़ते हुए हम लोग एक पतली
गली में घुस गए। इस गली से घर नजदीक पड़ता था। दूसरे रास्तों में बहुत भीड़ थी। बाजार
का दिन था। लेकिन बूंदें पड़ने से भीड़ के बिखराव में तेजी आ . गई थी। दौड़ इसलिए रहे
थे कि डर लगता था कि मछलियाँ बिना पानी के झोले में ही न मर जाएँ। झोले में तीन मछलियाँ
थीं। एक तो उसी वक्त मर गई थी जब पिताजी खरीद रहे थे। वो जिन्दा थीं। झोले में उनकी
तड़प के झटके मैं जब तब महसूस करता था। मन ही मन सोच रहा था कि एक मछली पिताजी से जरूर
माँग लेंगे। फिर उसे कुँए में डालकर बहुत बड़ी करेंगे। जब मन होगा बाल्टी में निकालकर
खेलेंगे। बाद में फिर कुँए में डाल देंगे।
अब जोर से पानी गिरने लगा
था। बरसते पानी में खड़े होकर झोले का मुँह आकाश की तरफ फैलोकर मैंने खोल दिया ताकि
आकाश का पानी झोले के अन्दर पड़ी मछलियों पर पड़े। पानी के छींटे पाकर, कहीं आसपास किसी तालाब या
नदी का अंदाजकर जोर से मछली उछली। झोला मेरे हाथ से छूटते-छूटते बचा।
नहानघर के बाल्टी में मैंने
झोले की तीनों मछलियाँ उड़ेल दीं। अगर बाल्टी भरी होती तो मछली उछलकर नीचे आ जाती।
एक बार एक छोटी सी मछली मेरे हाथ से फिसलकर नहानघर की नाली में घुस गई थी। हाथों से
मैंने और सन्तू ने हटोल टंटोलकर ढूँढा था। जब दिखी नहीं तो हम घर के पीछे जाकर खड़े
हो गए थे जहाँ घर की नाली एक बड़ी नाली से मिलती थी। गंदे पानी में मछली दिखी नहीं।
संतू मछलियों की तरफ प्यार
से देखता था। वह मछलियों को छूकर देखना चाहता था। लेकिन डरता भी था। बाल्टी के थोड़ा
और पास खिसककर एक मछली को पकड़ते हुए मैंने कहा, “संतू! तू भी छूकर देख ना””नहीं, काटेगी” संतू ने इनकार करते हुए कहा।
नीचे दबी हुई मछली
को आँखों में मैं अपनी छाया
देखना चाहता था। दीदी कहती थी जो मछली मर जाती है उसकी आँखों में झाँकने से अपनी परछाईं
नहीं दिखती।
“माँ कहाँ है ? उस तरफ मसाला पीस रही है।” मेरा दिल बैठ गया। “च: चः मछली के मसाला होगा” “आज ही बनेगी” दुःख से मैंने कहा।
“भइया! मछली अभी कट जायेगी।” भोलेपन से संतू ने पूछा। “हाँ” फिर संतू भी उदास हो गया।
माँ को घर में मछली, गोश्त खाया करें लेकिन माँ
ने सख्ती से मना कर दिया था। और किसी को अच्छा भी नहीं लगता था केवल पिताजी खाते थे।
भग्गू को जैसे मालूम था कि
मछलियाँ नहानघर में हैं। आते ही वह अंगोछे में तीनों मछलियाँ निकाल लाया। कुँए में
मछली पालने का उत्साह बुझ-सा गया था। कमरे में जाकर देखा तो सच में दीदी करवट लिए लेटी
थी। संतू को मैंने इशारे से बुलाया कि वह भी गीले कपड़े बदल ले। शायद कुछ आहट हुई होगी।
दीदी ने पलटकर हमें देखा। गीले कपड़ों में देखकर दीदी बहुत नाराज हुई। फिर प्यार से
समझाया। संतू को दीदी ने खुद अपने हाथों से जाने क्यों बहुत अच्छे-अच्छे कपड़े पहनाए।
मैं घर के धोए कपड़े पहिन रहा था तो दीदी ने कहा कि धोबी के धुले कपड़े पहिन लूँ। फिर
दीदी ने पेटी से मेरे लिए कपड़े निकाल दिए। संतू के बड़े-बड़े बाल थे इसलिए अभी तक
गीले थे। दीदी ने संतू के बालों को टावेल से पोंछकर, उनमें तेल लगाया। वायें हाथ से संतू की ठुड्डी पकड़कर दीदी ने
उसके बाल सँवार दिए। जब दीदी संतू के बाल सँवार रही थी तो संतू अपनी बड़ी-बड़ी आँखों
से दीदी को टकटकी बाँधे देख रहा था। सभी कहते थे कि दीदी बहुत सुन्दर है।
भग्गू मछली काट रहा था संतू
एक मछली अंगोछे से उठाकर बाहर की तरफ सरपट भागा। भग्गू भी मछली काटना छोड़कर “अरे! अरे! अरे!” कहता हुआ उसके पीछे-पीछे भागा।
मैं वहीं खड़ा रहा, पाटे में राख से पिटी हुई
सिर कटी हुई मछली पड़ी थी। बाड़े की तरफ आकर मैंने देखा कि कुंए के पास जमीन पर संतू
जानबूझकर पट पड़ा था। दोनों हाथों से मछली को अपने पेट के पास छुपाए हुए था। भग्गू
मछली छीनने की कोशिश कर रहा था। शायद उसे डर था कि संतू मछली कुँए में डाल देगा तो
पिताजी से उसे डाँट पड़ेगी। मैंने सुना कि अंदर की तरफ पिताजी के जोर-जोर से चिल्लाने
की आवाज आ रही थी। संतू सहमा-सहमा चुपचाप खड़ा था। कीचड़ से उसके साफ अच्छे कपड़े बिल्कुल
खराब हो गए थे। बाल जिसे दीदी ने प्यार से सँवारा था उसमें भी मिट्टी लगी थी।
शब्दार्थ
टटोला : अनुमान किया, थाह लिया
फर्श : पक्की जमीन
उत्सुकता : कुतूहल, जानने की इच्छा
छोर : किनारा
पाटा : फाँसुल, हँसुआ
आहट : ध्वनि, आवाज, संकेत
पेटी : बक्सा
टावेल : तौलिया
टकटकी : अपलक देखना
अंगोछा : गमछा
सरपट : तेजी
लहरना : तड़पना
सिसकियों : रुदन की अस्पष्ट
ध्वनि, धीमे-धीमे रोना
बाड़ा : अहाता
निचोड़ना : निथारना, गारना
The End
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