Page 24 Class 10 Political Science अध्याय 2 सत्ता में साझेदारी की कार्यप्रणाली

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अध्याय -  2 सत्ता में साझेदारी की कार्यप्रणाली

प्रश्नावली के प्रश्न और उनके उत्तर

 

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Question):

प्रश्न 1. संघ राज्य की विशेषता नहीं है:

(क) लिखित संविधान

(ख) शक्तियों का विभाजन

(ग) इकहरी शासन-व्यवस्था

(घ) सर्वोच्च न्यायपालिका

उत्तर: (ग) इकहरी शासन-व्यवस्था

2. संघ सरकार का उदाहरण है :

(क) अमेरिका

(ख) चीन

(ग) ब्रिटेन

(घ) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (क) अमेरिका


3. भारत में संघ एवं राज्यों के बीच अधिकारों का विभाजन कितनी सूचियों में हुआ है
?

(क) संघीय सूची, राज्य सूची

(ख) संघीय सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची
उत्तर: (ख) संघीय सूची
, राज्य सूची, समवर्ती सूची

 

II. निम्नलिखित मे से कौन-सा कथन सही है ?

1. सत्ता में साझेदारी सही है क्योकि :

(क) यह विविधता को अपने में समेट लेती है

(ख) देश की एकता को कमजोर करती है

(ग) फैसले लेने में देरी कराती है

(घ) विभिन्न समुदायों के बीच टकराव कम करती है।

उत्तर: (घ) विभिन्न समुदायों के बीच टकराव कम करती है.

2. संघवाद लोकतंत्र के अनुकूल है :

(क) संघीय व्यवस्था केन्द्र सरकार की शक्ति को सीमित करती है।

(ख) संघवाद इस बात की व्यवस्था करता है कि उस शासन-व्यवस्था के अंतर्गत रहनेवाले लोगो में आपसी सौहार्द एवं विश्वास रहेगा। उन्हें इस बात का भय नहीं रहेगा कि एक की भाषा, संस्कृति और धर्म दूसरे पर लाद दी जाएगी।
उत्तर: (ख)

 

III. नीचे स्थानीय स्वशासन के पक्ष में कुछ तर्क दिए गए हैं, इन्हें आप वरीयता के क्रम से सजाएँ ।

1. सरकार स्थानीय लोगों को शामिल कर अपनी योजनाएँ कम खर्च में पूरी कर सकती है?

2. स्थानीय लोग अपने इलाके की जरूरत, समस्याओं और प्राथमिकताओं को जानते हैं।
3. आम जनता के लिए अपने प्रदेश के अथवा राष्ट्रीय विधायिका के जनप्रतिनिधियों से संपर्क कर पाना मुश्किल होता है।

4. स्थानीय जनता द्वारा बनायी योजना सरकारी अधिकारियों द्वारा बनायी योजना में ज्यादा स्वीकृत होती है।

(ख) 2, 4, 1, 3.

 

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Questions):

प्रश्न 1. संघ राज्य का अर्थ बताएँ ।

उत्तर: संघ राज्य का अर्थ है सत्ता का ऊर्ध्वाधर वितरण। इस तरह के राज्य के लिए पूरे देश की एक सरकार- केन्द्रीय सरकार होती है और राज्य या प्रांतों के लिए अलग-अलग। केन्द्र और राज्यों के बीच संविधान में उल्लिखित सत्ता या शक्ति का स्पष्ट बँटवारा रहता है। राज्यों के नीचे भी सत्ता के साझीदार रहते हैं, जिन्हें स्थानीय स्वशासन कहते हैं। सत्ता के इसी बँटवारे को संघ राज्य या संघवाद कहते हैं।

 

प्रश्न 2. संघीय शासन की दो विशेषताएँ बताइए ।

उत्तर: संघीय शासन की दो विशेषताएँ निम्नांकित हैं :

(i) संघीय शासन में दोहरी सरकार होती है: एक केन्द्रीय स्तर की सरकार जिसके अधिकार क्षेत्र में राष्ट्रीय महत्त्व के विषय होते हैं और दूसरे स्तर पर प्रांतीय या राज्य सरकारें होती हैं, जिनके अधीन गौण विषय होते हैं।

(ii) प्रत्येक स्तर की सरकारें अपने-अपने अधिकारों के उपयोग के लिए स्वतंत्र रहती हैं, लेकिन उन्हें अपने कार्यों के प्रति जवाबदेह होना पड़ता है। यदि दोनों में मनमुटाव की स्थिति आती है तो केन्द्र का निर्णय ही मान्य होता है।

 

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions):

प्रश्न 1. सत्ता की साझेदारी से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: सत्ता की साझेदारी से तात्पर्य है कि उसकी जिम्मेदारी ऊपर से नीचे तक बँटी होती है। सत्ता की शक्तियाँ किसी एक बिन्दु पर ही सिमटने नहीं पातीं। वह विभिन्न रूपों में बँट जाती है। भारत का उदाहरण लें तो यहाँ केन्द्र और राज्यों के बीच प्रशासनिक अधिकार और कर्त्तव्य पूर्णतः बँटे होते हैं। सत्ता की साझेदारी का एक रूप (i) व्यवस्थापिका, (ii) कार्यपालिका तथा (iii) न्यायपालिका में बँटा हुआ होना भी है। न्यायपालिका यह देखती है कि कोई किसी के अधिकरों का अतिक्रमण नहीं करने पावे । राज्य सरकारें जिला से लेकर ग्राम पंचायतों तक सत्ता की साझेदारी की व्यवस्था करती हैं। नगर निगम, नगर पंचायत या नगरपालिका, नगर परिषद, जिला परिषद, पंचायत समिति, ग्राम पंचायत आदि इसी के उदाहरण हैं।

 

प्रश्न 2. सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र में क्या महत्त्व रखती है?

उत्तर: सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र में बहुत अधिक महत्त्व रखती है। इसी के चलते कोई किसी को दबाकर नहीं रख सकता। लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था ही एकमात्र ऐसी शासन व्यवस्था है, जिसमें ताकत सभी के हाथों में होती है।, सभी को राजनैतिक शक्तियों में हिस्सेदारी या साझेदारी करने की व्यवस्था रहती है। इसका महत्त्व विशेषतः इस बात में है कि किसी को असंतोष प्रकट करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। यदि बहुमत आपके साथ है तो इसका अर्थ है कि सभी आपसे संतुष्ट हैं। यदि किसी को केन्द्र में मौका नहीं मिलता, वह राज्य के शासन में साझेदारी कर सकता है। यदि वह इसमें भी असफल हो जाता है तो स्थानीय निकायों में अपना भाग्य आजमाता है। यदि वहाँ भी उसे जीत नहीं मिलती, उसका अर्थ है जनता उसे इस काबिल समझती ही नहीं। भले ही वे विरोध में झंडा लहराते रहें।

 

प्रश्न 3. सत्ता की साझेदारी के अलग-अलग तरीके क्या हैं?

उत्तर: सत्ता की साझेदारी के अलग-अलग तरीके निम्नलिखित हैं।

(i) केन्द्रीय शासन,   (ii) राज्य शासन तथा  (iii) स्थानीय स्वशासन

केन्द्रीय शासन के अधीन पूरे देश का शासन रहता है और उसे अधिक अधिकार प्राप्त होते हैं। राज्य शासन में राज्य की सरकारें अपने-अपने राज्यों का कार्य देखती है। इन्हें अपेक्षाकृत कम अधिकार प्राप्त रहते हैं। स्थानीय शासन में ग्राम पंचायतें, पंचायत समिति, जिला परिषद, नगर परिषद या नगरपालिका तथा नगर निगम होते हैं। ये संस्थाएँ स्थानीय कार्यों की जिम्मेदारी उठाती है। ग्राम पंचायतों को अधिक अधिकार प्राप्त हैं। यह आवश्यक नहीं कि कोई राजनीतिक दल या व्यक्ति विशेष सत्ता प्राप्त कर ही सत्ता में साझेदारी करे। यदि उसे बहुमत नहीं मिलता है तो सत्ता से बाहर रहकर भी सरकार पर अंकुश रखता है और सरकार को मनमानी नहीं करने देता ।

 

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions):

प्रश्न 1. राजनैतिक दल किस तरह सत्ता में साझेदारी करते हैं?

उत्तर: राजनैतिक दल सत्ता में साझेदारी को मूर्त्त रूप देने वाले जीते-जागते उदाहरण है। ये सत्ता के बँटवारे के सशक्त वाहक हैं। ये सामाजिक समूहों का प्रतिनिधि बनकर अच्छी तरह मोल-तोल कर लेते हैं। जहाँ वयस्क मताधिकार का रिवाज है (जैसे भारत), वहाँ वे अधिक संख्या में अपने प्रत्याशियों को जीतवा कर बहुमत प्राप्त करते हैं। बहुमत के आधार पर ही वे सत्ता में साझेदारी करते हैं। यदि बहुमत नहीं मिला तो विरोधी दल का कार्य करते हैं और सरकार को गलत काम करने से रोकने का प्रयास करते हैं। वे प्रश्न पूछकर सरकार पर दबाव बनाते हैं। अल्पमत दल इसी प्रकार सत्ता में साझेदारी करते हैं।

   लेकिन राजनैतिक दल ऐसे में ही सत्ता में नहीं पहुँच जाते। चुनाव आयोग द्वारा चुनाव घोषण-पत्र जारी करने के बाद राजनैतिक दल जनता को अपनी ओर करने में जुट जाते हैं। ये घोषण-पत्र जारी करते हैं, जिसमें ये दावा करते हैं कि सत्ता में आने के बाद ये क्या-क्या करेंगे ? अपने-अपने उम्मीदवार खड़े करते हैं। चुनाव के दिन मतदान होता है। एक निश्चित दिन को मतों की गिनती होती है। जिस दल के अधिक उम्मीदवार जीतते हैं, उस दल के नेता राष्ट्रपति या राज्यपाल के यहाँ अपनी सरकार बनाने का दावा पेश करता है। संतुष्ट हाने पर राष्ट्रपति या राज्यपाल मंत्रिमंडल गठित करने के लिए आमंत्रित करता और मंत्रिमंडल का गठन हो जाता है। एक निश्चित अवधि के अन्दर संसद या विधान सभा में बहुमत सिद्ध करना पड़ता है।

   जिस दल को बहुमत नहीं मिलता वह दल विरोधी दल में रहकर सरकार पर नियंत्रण रखने का कार्य करता है। यह कार्य भी बड़े महत्त्व का है।


प्रश्न 2. गठबंधन की सरकारों में सत्ता में साझेदार कौन-कौन होते हैं?

उत्तर: गठबंधन की सरकारों में सत्ता में साझीदार विभिन्न दलों के विधायक या सांसद होते हैं। ये दल चुनाव के समय गठबंधन करते हैं और मिलकर चुनाव लड़ते हैं और बहुमत प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। कभी-कभी चुनावों के बाद भी किसी एक दल को बहुमत नहीं मिलने पर कई दलों को मिलाकर गठबंधन करते हैं और बहुमत प्राप्त करते हैं, जैसे इक्कीसवीं सदी के प्रथम दशक के आरम्भ में भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत प्राप्त किया था और सफलतापूर्वक शासन चलाया था। गठबंधन की सरकारों में विभिन्न विचारधाराओं, विभिन्न सामाजिक समूहों, विभिन्न क्षेत्रीय और स्थानीय हितों वाले राजनीतिक दल एकसाथ, एक समय में सरकार के एक स्तर पर सत्ता में साझेदार होते हैं। लेकिन यह सदैव नहीं चल पाता। साझेदार दल कभी-कभी इतना लालची बन जाते हैं कि बात-बात पर मंत्रियों से सिफारिश कराना चाहते हैं। यदि उनकी बात नहीं सुनी जाय तो बार-बार समर्थन वापसी की धमकी देते हैं। सभी नेता वाजपेयी ही नहीं जो सबको एकसूत्र में बाँधे रखते थे। लेकिन इस तरह की सरकारें जनता के हित में काम नहीं कर पातीं। कारण कि सभी के अपने-अपने समर्थक होते हैं और वे पीछे से अपना गलत काम करा लेने के लिए दबाव बनाए रखते हैं। फलतः सरकार खुलकर सही काम नहीं कर पाती। जनता को ऐसी स्थिति आने ही नहीं देनी चाहिए।

 

प्रश्न 3. दबाव समूह किस तरह से सरकार को प्रभावित कर सत्ता में साझेदार बनते हैं?

उत्तर: दबाव समूह तब तैयार होता है जब विभिन्न हितों एवं नजरिये की अभिव्यक्ति संगठित तरीके से राजनीतिक दलों के अतिरिक्त जनसंघर्ष तथा जनआन्दोलन के द्वारा अपने को संगठित करते हैं। दबाव समूह के समान जनसंघर्ष एवं जनआन्दोलन में अनेक प्रकार के हित समूह शरीक होते हैं या यह भी सम्भव है कि वे कुछ हितों के बजाय सर्वमान्य हितों के लिए संघर्ष कर रहे होते हैं। किसी तरह भी हो, होना यही चाहिए कि लोकतंत्र में किसी एक समूह के हित की नहीं, बल्कि सभी समूहों के हित की रक्षा होनी चाहिए। दबाव समूह इसी तरह संगठित होकर सरकार को प्रभावित कर सत्ता में साझेदार बनते हैं या बन सकते हैं।

   लेकिन दबाव समूह को किसी लालच या लोभ से काम नहीं करना चाहिए। 1974 में छात्रों ने जो आन्दोलन चलाया और जिसका नेतत्व लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने किया, वह किसी लोभ में नहीं किया गया था। यह बात दूसरी है कि बाद में अनेक स्वार्थी लोगों का उदय हो गया, जिन्होंने सरकार को चलने नहीं दिया और इन्दिरा गांधी को प्रधानमंत्री बनने का पुनः मौका मिल गया। यदि सभी निर्लोभी बनकर काम करते तो सरकार गिरने की नौबत ही नहीं आती।

   मोरारजी की सरकार को गिराना जनता के प्रति धोखा था। इसके लिए जनता ने उन्हें चुनकर नहीं भेजा था। अतः दबाव समूह को यह भी सोचना चाहिए कि जनमानस की इच्छाओं की हत्या नहीं होने पावे ।

   विजयलक्ष्मी पंडित, जगजीवन राम, बहुगुणा आदि जयप्रकाशजी के हित में नहीं, बल्कि उनके किए कराए पर पानी फेरने के लिए जनता पार्टी में शामिल हुए थे। फिर कुछ लोहियावादी समाजवादियों ने भी भीतरघात करके सरकार को गिरवा दिया, जिससे इन्दिरा गाँधी को पुनः मौका मिला गया।

प्रश्न 3. निम्नलिखित में से किसी एक कथन का समर्थन करते हुए 50 शब्दों में उत्तर दें।

(क) हर समाज में सत्ता की साझेदारी की जरूरत होती है, भले ही वह छोटा हो या उसमें सामाजिक विभाजन नहीं हो।

(ख) सत्ता की साझेदारी की जरूरत क्षेत्रीय विभाजन वाले बड़े देशों में ही होती है।

(ग) सत्ता की साझेदारी की जरूरत क्षेत्रीय, भाषायी जातीय आधार पर विभाजन वाले समाज में ही होती है।

 

उत्तर: (क) सत्ता में साझेदारी वास्तव में व्यक्ति की कमजोरी रही है। समाज चाहे जिनता भी छोटा है, उसमें कुछ व्यक्ति ऐसे अवश्य सामने आ जाएँगे, जो सत्ता में हिस्सेदारी चाहेंगे। यदि उनमें किसी प्रकार की फूट न भी हो तो कुछ बाहरी तत्व उसमें घुसकर फूट उत्पन्न कर देते हैं। नेपाल एक बहुत छोटा देश है और समाज भी बहुत बिखरा नहीं है। लेकिन एक राजनीतिक दल में समाज में प्रवेश कर उनमें फूट की स्थिति को उत्पन्न कर दिया। परिणाम हुआ कि राजा से शासन छीन कर प्रजातंत्र की स्थापना कर दी गई। चुनाव हुआ लेकिन एक दल को बहुमत नहीं मिलने के कारण गठबंधन की सरकार बनानी पड़ी। एक खास दल को उससे भी संतोष नहीं है। इस प्रकार हम देखते हैं कि समाज छोटा है लेकिन सत्ता में साझेदारी की बेचैनी बढ़ गई है।

 

(ख) सत्ता की साझेदारी की जरूरत क्षेत्रीय विभाजन वाले बड़े देशों में तो नितांत रूप से होती है। यदि ऐसे क्षेत्रीय विभाजन वाले बड़े देशों में सत्ता की साझेदारी नदी जाय तो देश में भारी संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। यदि ऐसा न हो तो सत्ता प्राप्त व्यक्ति निरंकुश हो जा सकता है और वह मनमानी शासन कर लोोगें को तबाही में डाल सकता है। अतः हम निश्चयपूर्वक कह सकते हैं कि क्षेत्रीय विभाजन वाले बड़े देशों में सत्ता की साझेदारी होनी ही चाहिए।

 

(ग) यह कहना पूर्ण रूप से सही नहीं है कि सत्ता की साझेदारी की जरूरत क्षेत्रीय, भाषाई, जातीय आधार पर विभाजन वाले समाज में ही होती है। इसके अलावे कुछ अन्य तत्व भी हैं, जिनके कारण सत्ता की साझेदारी की आवश्यकता पड़ती है। नस्ल भेद, रंग भेद, लिंग भेद आदि बहुत ऐसे तत्व हैं, जिनके लिए सत्ता में साझेदारी की जरूरत पड़ती है। अमीरी और गरीबी भी एक तत्व हो सकती है। इसके अलावे भी कुछ ऐसे तत्व हैं, जिन्हें सत्ता में किसी-न-किसी रूप में साझेदारी देनी पड़ती है ताकि समाज में संघर्ष की स्थिति नहीं आने पावे ।

(किसी एक को ही लिखें।)

 

कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न तथा उनके उत्तर

प्रश्न 1. लोकतंत्र में सत्ता की साझेदारी की क्या आवश्यकता है?

उत्तर: लोकतंत्र में सत्ता की साझेदारी की आवश्यकता इसलिए है ताकि समाज का हर वर्ग तथा हर क्षेत्र के लोग संतुष्ट रहें।

 

प्रश्न 2. सामज में विभिन्नताएँ कितने प्रकार से व्यक्त की जाती हैं?

उत्तर: समाज में विभिन्नताएँ निम्नलिखित छः प्रकार से व्यक्त की जाती हैं :
(i) धर्म भेद, (ii) जाति भेद, (iii) रंग भेद, (iv) लिंग भेद, (v) भाषा भेद तथा

(vi) परम्परा भेद इत्यादि ।

 

प्रश्न 3. सत्ता जब एक व्यक्ति के हाथ में सिमट जाती है तो क्या परिणाम होता है?

उत्तर: सत्ता जब एक व्यक्ति के हाथ से सिमट जाती है तो समाज में असंतोष फैलता है तथा शासक निरंकुश हो जाता है।

 

प्रश्न 4. लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा तानाशाही में क्या अंतर है?

उत्तर: लोकतांत्रिक व्यवस्था में देश के सभी लोगों को शासन में अधिकार रहता है तथा संप्रभुता जनता में निहित होती है। इसके विपरीत तानाशाही में सारा अधिकार एक व्यक्ति या एक समाज में निहित हो जाता है तथा संप्रभुता पर भी वही हावी रहता है।

 

प्रश्न 5. लोकतंत्र के लिए परीक्षा की घड़ी कब आती है?

उत्तर: लोकतंत्र के लिए परीक्षा की घड़ी तब जाती है जब सत्ताधारी और सत्ता में साझेदारी की आकांक्षा रखने वालों को बीच में संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

 

प्रश्न 6. सत्ता विभाजन के पक्ष और विपक्ष में दो-दो तर्क दीजिए :

उत्तर:
सत्ता विभाजन के पक्ष में दो तर्क

(i) सत्ता विभाजन विभिन्न भाषा एवं धर्म के लोगों को सत्ता में भागीदारी कराती है।

(ii) विभिन्न समुदायों के बीच टकराव नहीं होने देती।


सत्ता विभाजन के विपक्ष में दो तर्क :

(i) फैसले लेने में देरी कराती है।

(ii) देश की एकता कमजोर कराती है।

 

प्रश्न 7. सत्ता की साझेदारी का रूप स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर: सत्ता की साझेदारी का रूप तब स्पष्टतः दिखाई पड़ता है जब दो या दो से अधिक राजनीतिक दल चुनाव लड़ते हैं या मिलकर सरकार का गठन करते हैं। इधर आकर सत्ता की साझेदारी का आधुनिकतम रूप गठबंधन की सरकारों के रूप में हुआ है। गठबंधन की सरकार में विभिन्न विचारधारा, विभिन्न सामाजिक समूहों तथा विभिन्न क्षेत्रीय और स्थानीय हितों वाले राजनीतिक दल मिलकर सरकार बनाते हैं और सत्ता में साझेदारी करते हैं।

 

प्रश्न 8. लोकतंत्र में विभिन्न हितों एवं विभिन्न नजरिये की अभिव्यक्ति कैसे होती है?

उत्तर: लोकतंत्र में विभिन्न हितों और विभिन्न नजरिये की अभिव्यक्ति सही ढंग से राजनीतिक दल ही करते हैं। इनके अलावा जनसंघर्ष एवं जनआंदोलन के द्वारा भी विभिन्न हितों और नजरिये की अभिव्यक्ति होती है। 1974 में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में हुआ जन आन्दोलन इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। दबाव समूह के समान जनसंघर्ष एवं जन आन्दोलन में अनेक तरह के हित समूह शरीक होते हैं। कभी-कभी यह भी होता है कि संघर्षकर्ता कुछ हितों के बजाय सर्वमान्य हितों के लिए संषर्घ कर रहे होते हैं। जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चला आंदोलन ऐसा ही संघर्ष था। वे सभी के हितों की रक्षा चाहते थे। वे इन्दिरा गाँधी के तानाशाही रवैये को समाप्त कराना चाहते थे और उन्होंने वैसा किया भी। यह दूसरी बात है कि कुछ लोगों ने धोखा दे दिया।


प्रश्न 9. बेल्जियम ने भाषायी समूहों से निपटने के लिए क्या उपाय किये ?

उत्तर: बेल्जियम यूरोप महाद्वीप में एक छोटा-सा देश हे, जहाँ की आबादी लगभग एक करोड़ या इससे भी कुछ कम ही है। यहाँ भाषा की समस्या पेचिदा हो गई थी। यहाँ की कुल आबादी का 50% लोग डच भाषी हैं तथा 49% लोग फ्रेंच बोलने वाले तथा 1% लोग जर्मन भाषा बोलने वाले हैं। राजधानी बुसेल्स में 80% लोग फ्रेंच बोलते हैं तथा 20% लोग डच। आगे चलकर अपना आर्थिक विकास कर तथा शिक्षा प्राप्त कर अल्पभाषी डच कम संख्या में रहने पर भी आर्थिक तथा शैक्षिक रूप से ताकतवर हो गए। राजधानी में रह रहे अल्पभाषी फ्रेंच तुलनात्मक रूप से अपेक्षाकृत समृद्ध और ताकतवर थे। डच अपनी स्थिति से असंतुष्ट रहते थे। वे फ्रेंच लोगों से नाराज रहते थे। 1950 एवं 1960 के दशक में फ्रेंच एवं डच भाषाई समुदायों के बीच तनाव बढ़ने लगा। टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। दोनों भाषाई समूहों के बीच टकराव से निपटने के लिए बेल्जियम की सरकार ने निम्नलिखित उपाय किए :

   (i) संविधान में एक नया प्रावधान सम्मिलित करके केन्द्रीय सरकार में डच और फ्रेंच भाषी मंत्रियों की संख्या बराबर कर दी गई।

   (ii) विशेष कानूनों का निर्णय दोनों भाषाई सांसदों के बहुमत होने पर ही करने का प्रावधान किया गया।

   (iii) केन्द्रीय सरकार की अनेक शक्तियाँ क्षेत्रीय सरकारों को सौंप दी गई।

   (iv) राजधानी ब्रुसेल्स की अलग सरकार में दोनों समुदायों का समान प्रतिनिधित्व है। ब्रुसेल्स के समान प्रतिनिधित्व इस प्रावधान को स्वीकार कर लिया क्योंकि डच भाषी लोगों ने केन्द्रीय सरकार में बराबरी का प्रतिनिधित्व स्वीकार कर लिया था।

   (v) केन्द्रीय और राज्य सरकारों के अलावा तीसरे स्तर की सरकार - सामुदायिक सरकार का चुनाव एक ही भाषा बोलने वाले लोग करते हैं। डच, फ्रेंच और जर्मन बोलने वाले लोग, चाहे वे जहाँ भी रहते हों, इस सामुदायिक सरकार को चुनते हैं। सामुदायिक सरकार को संस्कृति, शिक्षा और भाषा जैसे मसलों पर फैसला लेने का अधिकार है।

इस प्रकार बेल्जियम ने भाषा के आधार पर चल रहे तनाव पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया।


The   End 

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इसे भी देखें

 प्रश्न 1. भारत की संघीय व्यवस्था में बेल्जियम से मिलती-जुलती एक विशेषता और उससे अलग एक विशेषता को बताएँ।

उत्तर:- बेल्जियम से मिलती-जुलती व्यवस्था – भारत में संविधान ने मौलिक रूप से दो स्तरीय शासन व्यवस्था का प्रावधान किया था-संघ सरकार और राज्य सरकारें। केंद्र सरकार को पूरे भारतीय संघ का प्रतिनिधित्व करना था और अलग-अलग राज्यों के लिए राज्य सरकारें होगीं। केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का बँटवारा संविधान में विषयों की तीन सूचियों के द्वारा कर दिया गया। बेल्जियम में भी केंद्र और राज्य दो प्रकार की सरकारें हैं और दोनों ही अपने-अपने क्षेत्र में स्वतंत्र हैं।

बेल्जियम से अलग एक विशेषता – केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सत्ता का बँटवारा हमारे संविधान की बुनियादी बात है। अधिकारों के इस बँटवारे में बदलाव करना आसान नहीं है। अकेले संसद इसमें परिवर्तन नहीं कर सकती। इसके लिए पहले संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पास करना होगा, फिर कम-से-कम आधे राज्यों की विधानसभाओं से उसे मंजूर करवाना होगा। इसलिए इस विशेषता को कठोर संविधान कहते हैं। यह संघात्मक शासन के लिए जरूरी है।

प्रश्न 2. शासन के संघीय और एकात्मक स्वरूपों में क्या-क्या मुख्य अंतर हैं? इसे उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट करें।
उत्तर
NCERT Solutions for Class 10 Social Science Civics Chapter 2 (Hindi Medium) 6
NCERT Solutions for Class 10 Social Science Civics Chapter 2 (Hindi Medium) 2.2

प्रश्न 3. 1992 के संविधान संशोधन के पहले और बाद के स्थानीय शासन के दो महत्त्वपूर्ण अंतरों को बताएँ।
उत्तर:- भारत में सत्ता के विकेंद्रीकरण के लिए सभी राज्यों में गाँव के स्तर पर ग्राम पंचायतों और शहरों में नगरपालिकाओं की स्थापना की गई थी। पर उन्हें राज्य सरकारों के सीधे नियंत्रण में रखा गया था। इन स्थानीय सरकारों के लिए नियमित ढंग से चुनाव भी नहीं कराए जाते थे। इनके पास न तो कोई अधिकार था न कोई संसाधन।1992 में संविधान में संशोधन करके लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के तीसरे स्तर को मजबूत बनाया गया।

  1. अब स्थानीय स्वशासी निकायों के चुनाव नियमित रूप से कराना संवैधानिक बाध्यता है।
  2. निर्वाचित स्वशासी निकायों के सदस्य तथा पदाधिकारियों के पदों में अनुसूचित जातियों, जनजातियों और पिछड़ी जातियों के लिए सीटें आरक्षित हैं।
  3. राज्य सरकारों को अपने राजस्व और अधिकारों का कुछ हिस्सा इन स्थानीय स्वशासी निकायों को देना पड़ता है।
  4. कम-से-कम एक तिहाई पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
  5. हर राज्य में पंचायत और नगरपालिका चुनाव कराने के लिए राज्य चुनाव आयोग नामक स्वतंत्र संस्था का गठन किया गया है।

इस संशोधन द्वारा स्थानीय स्तर पर शासन को अधिक शक्तिशाली और प्रभावी बनाया गया।

प्रश्न 4. भारत की भाषा नीति पर तीन प्रतिक्रियाएँ दी गई हैं। इनमें से आप जिसे ठीक समझते हैं उसके पक्ष में तर्क और उदाहरण दें

  • संगीता – प्रमुख भाषाओं को समाहित करने की नीति ने राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया है।
  • अरमान – भाषा के आधार पर राज्यों के गठन ने हमें बाँट दिया है। हम इसी कारण अपनी भाषा के प्रति सचेत हो गए हैं।
  • हरीश – इस नीति ने अन्य भाषाओं के ऊपर अंग्रेजी के प्रभुत्व को मजबूत करने भर का काम किया है।

उत्तर:- संगीता का भारत की भाषा नीति पर तर्क सही है। उसका कहना है कि प्रमुख भाषाओं को समाहित करने की नीति ने राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया है। भारत में 40 प्रतिशत लोग हिंदी बोलते हैं। हिंदी के अतिरिक्त भी बहुत-सी भाषाएँ बोली जाती हैं। यदि किसी एक भाषा को प्रमुख बना दिया जाता तो अन्य भाषायी लोगों के सामने कई समस्याएँ खड़ी हो जातीं। भारतीय राजनेताओं ने सभी प्रमुख भाषाओं को समाहित करके जो लचीला रुख अपनाया उसी से हमारे देश में शांति व व्यवस्था बनी हुई है तथा हम श्रीलंका जैसी गृहयुद्ध व अशांति की स्थिति में पहुँचने से बच हुए हैं।

प्रश्न 5. संघीय सरकार की एक विशिष्टता है।

(क) राष्ट्रीय सरकार अपने कुछ अधिकार प्रांतीय सरकारों को देती है।
(ख) अधिकार विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच बँट जाते हैं।
(ग) निर्वाचित पदाधिकारी ही सरकार में सर्वोच्च ताकत का उपयोग करते हैं।
(घ) सरकार की शक्ति शासन के विभिन्न स्तरों के बीच बँट जाती है।

उत्तर (घ) सरकार की शक्ति शासन के विभिन्न स्तरों के बीच बँट जाती है।

प्रश्न 6.
 भारतीय संविधान की विभिन्न सूचियों में दर्ज कुछ विषय यहाँ दिए गए हैं। इन्हें नीचे दी गई तालिका में संघीय सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची वाले समूहों में लिखें –
(क) रक्षा     (ख) पुलिस       (ग) कृषि         (घ) शिक्षा      (ङ) बैंकिंग
(च) वन       (छ) संचार        (ज) व्यापार      (झ) विवाह।

NCERT Solutions for Class 10 Social Science Civics Chapter 2 (Hindi Medium) 4

उत्तर: - 
NCERT Solutions for Class 10 Social Science Civics Chapter 2 (Hindi Medium) 5

प्रश्न 7. नीचे भारत में शासन के विभिन्न स्तरों और उनके कानून बनाने के अधिकार-क्षेत्र के जोड़े दिए गए हैं। इनमें से कौन-सा जोड़ा सही मेल वाला नहीं है?

(क) राज्य सरकार – राज्य सूची
(ख) केंद्र सरकार – संघीय सूची
(ग) केंद्र और राज्य सरकार – समवर्ती सूची
(घ) स्थानीय सरकार – अवशिष्ट अधिकार

उत्तर:-     (घ) स्थानीय सरकार – अवशिष्ट अधिकार

English Medium

 Question 1. In the federal system of India, give one feature similar to that of Belgium and one feature that is different from it.

Answer:- System similar to Belgium - The Constitution in India had originally made a provision for two-tier governance - the Union Government and the State Governments. The central government was to represent the entire Indian Union and there would be state governments for the individual states. The distribution of powers between the Center and the states was done through three lists of subjects in the Constitution. In Belgium also there are two types of governments, center and state, and both are independent in their respective areas.

A feature different from Belgium – the sharing of power between the central and state governments is a fundamental feature of our constitution. It is not easy to change this distribution of rights. Parliament alone cannot change it. For this, the resolution will have to be first passed by a two-thirds majority in both the houses of the Parliament, then it will have to be approved by the legislatures of at least half of the states. That's why this feature is called rigid constitution. This is essential for a federal government.

Question 2. What are the main differences between federal and unitary forms of government? Explain it through examples.

Answer:-

Federal GovernmentUnitary Government
1. Federalism is a system of government in which the power is divided between a central authority and various constituent units of the country,1. Under unitary system, either there is only one level of government or the sub- units are subordinate to the central government.
2. In a federal system, the central government cannot order the state government to do something.2. The centra! government can pass on orders to the provincial or the local government in a unitary system.
3. State government has powers of its own for which it is not answerable to the central government.3. In a unitary system, state governments get their powers from the central government and they are answerable to the central government for their actions.

Question 3. State two important differences between local government before and after the constitutional amendment of 1992.

Answer:- For decentralization of power in North India, village panchayats were established at the village level in all the states and municipalities in the cities. But they were placed under the direct control of the state governments. Elections to these local governments were also not held regularly. They had neither any rights nor any resources. In 1992, by amending the constitution, the third level of democratic governance was strengthened.

1. Now it is a constitutional obligation to conduct regular elections to local self-governing bodies.

2. Seats are reserved for the Scheduled Castes, Scheduled Tribes and Backward Castes in the offices of members and office bearers of the elected self-governing bodies.

3. The state governments have to give some part of their revenue and powers to these local self-governing bodies.

4. At least one third of the posts are reserved for women.

5. An independent body called State Election Commission has been constituted to conduct Panchayat and Municipal elections in every state.

By this amendment the governance at the local level was made more powerful and effective.

Question 4. Three responses are given on the language policy of India. Give arguments and examples in favor of the one you think is correct

Sangeeta – The policy of integrating major languages ​​has strengthened national integration.

Armaan – The formation of states on the basis of language has divided us. That is why we have become conscious of our language.

Harish - This policy has only worked to strengthen the dominance of English over other languages.

Answer:- Sangeeta's argument on the language policy of India is correct. He says that the policy of integrating the major languages ​​has strengthened national unity. Hindi is spoken by 40 percent of the people in India. Apart from Hindi, many languages ​​are also spoken. If one language was made the dominant language, then many problems would arise in front of the other linguistic people. The flexible approach adopted by Indian politicians by integrating all the major languages ​​has maintained peace and order in our country and saved us from reaching a state of civil war and unrest like Sri Lanka.

Question 5. A feature of the federal government is

(a) The national government delegates some of its powers to the provincial governments.

(b) Powers are divided between the legislature, executive and judiciary.

(c) Elected officials exercise supreme power in the government.

(d) The power of the government is divided among the different levels of government.


Ans :- (d) The power of the government is divided among the different levels of governance.

Question 6. Here are some of the subjects listed in the various lists of the Indian Constitution. Write them in the following table in the groups of Union List, State List and Concurrent List –

(a) Defense    (b) Police     (c) Agriculture     (d) Education     (e) Banking

(f) Forest    (g) Communication        (h) Trade (i) Marriage.

Union List............................................................................
State List.............................................................................
Concurrent List.................................................................

Answer:

Union ListDefence, Banking Communication
State ListPolice, Agriculture, Trade
Concurrent ListEducation, Forest, Marriages.

Question 7. Given below are the pairs of different levels of governance in India and their law making jurisdiction. Which of the following pair is not a correct match?

(a) State Government – ​​State List

(b) Central Government – ​​Federal List

(c) Central and State Governments – Concurrent List

(d) Local Government – ​​Residuary Rights

Answer:- (d) Local Government – ​​Residuary Rights

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