Page 441 CLASS 10TH GEOGRAPHY NCERT BOOK SOLUTIONS Unit 1. (घ) खनिज संसाधन

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प्राकृतिक संसाधन
(घ) खनिज संसाधन

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न 1. भारत में लगभग कितने खनिज पाए गए हैं ?

(क) 50

(ख) 100

(ग) 150

(घ) 200

उत्तर: (ख) 100

प्रश्न 2. इनमें से कौन लौहयुक्त खनिज का उदाहरण है ?

(क) मैगनिज

(ख) अभ्रक

(ग) बॉक्साइड

(घ) चूना पत्थर

उत्तर: (क) मैगनिज


प्रश्न 3. निम्नलिखित में कौन अधात्विक खनिज का उदाहरण है ?

(क) सोना

(ख) टीन

(ग) अभ्रक

(घ) ग्रेफाइट

उत्तर: (घ) ग्रेफाइट

प्रश्न 4. किस खनिज को उद्योगों की जननी माना गया है ?

(क) सोना

(ख) ताँबा

(ग) लोहा

(घ) मैंगनीज

उत्तर: (ग) लोहा

प्रश्न 5. कौन लौह अयस्क का एक प्रकार है ?

(क) लिगनाइट

(ख) हेमाटाइट

(ग) बिटुमिनस

(घ) इनमें से सभी

उत्तर: (ख) हेमाटाइट

प्रश्न 6. भारत का सबसे बड़ा लौह उत्पादक राज्य कौन है?

(क) कर्नाटक

(ख) गोवा

(ग) उड़ीसा

(घ) झारखंड

उत्तर: (क) कर्नाटक

प्रश्न 7. छत्तीसगढ़ भारत का कितना प्रतिशत लौह अयस्क उत्पादन करता है ?

(क) 10

(ख) 20

(ग) 30

(घ) 40

उत्तर: (ख) 20

प्रश्न 8. मैगनीज उत्पादन में भारत का विश्व में क्या स्थान है ?

(क) प्रथम

(ख) द्वितीय

(ग) तृतीय

(घ) चतुर्थ

उत्तर: (ग) तृतीय

 

प्रश्न 9. एक टन इस्पात बनाने में कितने मैंगनीज का उपयोग होता है ?

(क) 5 कि. ग्रा.

(ख) 10 कि. ग्रा.

(ग) 15 कि. ग्रा.

(घ) 20 कि. ग्रा.

उत्तर: (ख) 10 कि. ग्रा.

प्रश्न 10. उड़ीसा किस खनिज का सबसे बड़ा उत्पादक है ?

(क) लौह अयस्क

(ख) मैंगनीज

(ग) टीन

(घ) ताँबा

उत्तर: (ख) मैंगनीज

प्रश्न 11. अल्युमिनियम बनाने के लिए किस खनिज की आवश्यकता पड़ती है ?

(क) मैंगनीज

(ख) टिन

(ग) लोहा

(घ) बॉक्साइट

उत्तर: (घ) बॉक्साइट

प्रश्न 12. देश में ताँबे का कुल भण्डार कितना है ?

(क) 100 करोड़ टन

(ख) 125 करोड़ टन

(ग) 150 करोड़ टन

(घ) 175 करोड़ टन,

उत्तर: (ख) 125 करोड़ टन

प्रश्न 13. बिहार-झारखण्ड में देश का कितना प्रतिशत अभ्रक का उत्पादन होता है ?

(क) 60

(ख) 70

(ग) 80

(घ) 90

उत्तर: (ग) 80

प्रश्न 14. सीमेंट उद्योग का सबसे प्रमुख कच्चा माल क्या है ?

(क) चूना-पत्थर

(ख) बॉक्साइड

(ग) ग्रेनाइट

(घ) लोहा

उत्तर: (क) चूना-पत्थर

लघु उत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1. खनिज क्या है?

उत्तर: निश्चित अनुपात में रासायनिक एवं भौतिक विशिष्टताओं के साथ निर्मित प्राकृतिक पदार्थ, जिनसे हम विभिन्न उपयोगी पदार्थ रासायनिक विधियों से प्राप्त करते हैं, वही खनिज है। इसे दूसरे ढंग से यदि हम कहें तो कहेंगे कि निश्चित रासायनिक, संयोजन एवं विशिष्ट आंतरिक परमाणविक संरचना वाले ठोस प्राकृतिक पदार्थ जो हमें पृथ्वी के अन्दर से प्राप्त होते हैं, वे सब 'खनिज' कहलाते हैं। हमें इतनी जानकरी रखनी चाहिए कि स्थल मंडल चट्टानों से बना है, जो चट्टान खजिनों के संयोग से बने हाते हैं। खनिज आर्थिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण होते हैं।

 

प्रश्न 2. धात्विक खनिज के दो प्रमुख पहचान क्या हैं?

उत्तर: धात्विक खनिज के दो प्रमुख पहचान निम्नलिखित हैं :

(1) धात्विक खनिज में धातु पायी जाती है।

(ii) धात्विक खनिज में जो धातु पायी जाती है, वे चमकीली, तन्य और ठोकने पर आवाज देने वाली होती है।

 

प्रश्न 3. खनिजों की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: खनिजों की मुख्य विशेषताएँ है कि उनका वितरण असमान है। अधिक गुणों वाले खनिजों की प्राप्ति अल्प मात्रा में होती है, वहीं कम गुणों वाले खनिज अपेक्षाकृत अधिक पाए जाते हैं। खनिज वैसे संसाधन हैं, जो समाप्य है। एक-न-एक दिन वे अवश्य ही समाप्त हो जाएँगे। एक बार उपयोग कर लेने के बाद इनका पुनः उपयोग नहीं हो सकता । खनिज मितव्ययिता पूर्ण तरीके से उपयोग करने वाले होते हैं।

 

प्रश्न 4. लौह अयस्क के प्रकारों के नाम लिखिए।

उत्तर: लौह अयस्क के तीन प्रकारों के नाम निम्नलिखित हैं:

(i) हेमाटाइट, (ii) मैग्नेटाइट तथा (iii) लिमोमाइट।
इनके उपनाम भी दिए गए हैं। वे हैं: क्रमशः
(
i) लाल अयस्क, (ii) काला अयस्क तथा (iii) पीला अयस्क ।

 

प्रश्न 5. भारत में लोहे के प्रमुख उत्पादक राज्यों के नाम लिखिए ।

उत्तर: भारत में लोहे के प्रमुख उत्पादक राज्य निम्नलिखित हैं:

(i) कर्नाटक, (ii) छत्तीसगढ़, (iii) उड़ीसा, (iv) गोवा, (v) झारखंड, (vi) महाराष्ट्र, (vii) आंध्रप्रदेश तथा (viii) तमिलनाडु ।

 

प्रश्न 6. झारखंड के प्रमुख लौह उत्पादक जिलों के नाम लिखिए ।

उत्तर: झारखंड के प्रमुख लौह उत्पादक जिले निम्नलिखित हैं :

(i) सिहभूम, (ii) पलामू, (iii) धनबाद, (iv) हजारीबाग, (v) संथाल परगना तथा

(vi) राँची।

 

प्रश्न 7. मैंगनीज के उपयोग पर प्रकाश डालिए ।

उत्तर: मैंगनीज के अनेक उपयोग हैं। जंगरोधी इस्पात बनाने में मैंगनीज का उपयोग होता है। मिश्र धातु बनाने में भी इसका उपयोग होता है। इसका उपयोग शुष्क बैटरी बनाने में भी होता है। इन प्रमुख उपयोगों के अतिरिक्त फोटोग्राफी का समान बनाने, चमड़े की सफाई में तथा दियासलाई बनाने में भी इसका उपयोग होता है।

 

प्रश्न 8. अल्यूमिनियम के उपयोग का उल्लेख कीजिए ।

उत्तर: अल्यूमिनियम के अनेक उपयोग हैं। सर्वप्रथम इसका उपयोग घरेलू बर्तनों को बनाने में हुआ। बाद में हल्की होने के गुण के कारण इससे वायुयान का बॉडी बनने लगा। अब विद्युत उपकरण बनाने में इसका उपयोग धड़ल्ले से होने लगा है। पहले बिजली के तार में जहाँ ताँबे का उपयोग होता था, अब अल्यूमिनियम का उपयोग होने लगा है। कारण कि यह ताँबा की अपेक्षा काफी सस्ता है। सफेद सीमेंट तथा रासायनिक सामान बनाने में इसका उपयोग होता है।

 

प्रश्न 9. अभ्रक का क्या उपयोग है?

उत्तर: अभक ताप तथा विद्युत, दोनों का कुचालक है। अतः इससे विद्युत उपकरण बनाने की प्रचचीन परम्परा रही है। अभ्रक से आयुर्वेदिक औषधि भी बनती रही है।

उस आयुर्वेदिक औषधि का नाम है 'सहस्रपुटि अभ्रक भस्म' इसे बनाना समयसाध्य तथा श्रमसाध्य, दोनों है। इसलिए असली औषधि का मिलना कठिन है। अभी आज की स्थिति में अभख का उपयोग केवल विद्युत रोधक यंत्र बनाने में किया जा रहा है।

 

प्रश्न 10. चूना पत्थर की क्या उपयोगिता है?

उत्तर-चूना पत्थर की निम्नलिखित उपयोगिता है :

(i) चूना पत्थर सीमेंट उद्योग को प्रमुख कच्चा माल है। (ii) लौह-इस्पात बनाने में भी चूना पत्थर उपयोगी है। (iii) इसका रसायन उद्योग में भी उपयोग होता है। उर्वरक, कागज, चीनी आदि बनाने में भी इसका उपयोग होता है। भवन बनाने तथा उनकी पुताई (White Washing) में चूना का उपयोग प्राचीन काल से ही होता रहा है।

 

प्रश्न 11. खनिजों की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: खनिजों की विशेषता उल्लेखनीय है। आज ये आधुनिक विश्व की रीढ़ की हड्डी बने हुए हैं। औद्योगिक क्रांति के बाद इनका महत्त्व तो बढ़ा ही है, प्राचीन काल में भी इसका उपयोग होता था। खेती के उपकरण तथा युद्धोपयोगी आयुधों का निर्माण लोहा से ही होता था, जो एक प्रमुख खनिज है। जिस देश के पास कोई खनिज नहीं हो, तो निश्चत ही उसका विकास अवरुद्ध हो सकता है। जिन देशों के पास खनिज का अभाव रहता है, वे आयात कर मानव संसाधन का उपयोग कर अपने देश का विकास करते हैं, जैसे-जापान ।

 

प्रश्न 12. खनिजों के संरक्षण एवं प्रबंधन से क्या समझते हैं?

उत्तर: खनिज क्षयशील तथा अनवीकरणीय संसाधन हैं। इनकी मात्रा सीमित है। ये यदि एक बार समाप्त हो गए तो इन्हें हम पुनः प्राप्त नहीं कर सकते। यदि लाभके लाचल में मनुष्य इनका अतिशय दोहन करने लगे तो पुनः इन्हें प्राप्त करने के लिए लाखों-लाख वर्षों तक प्रतीक्षा करनी होगी। जिस देश में आर्थिक विकास नहीं हुआ है और वह देश खनिज संसाधनों में धनी है तो वह उनका निर्यात कर अपनी अर्थव्यवस्था संतुलित रखता है। अतः इनके महत्त्व को समझते हुए इनका संरक्षण तथा उचित प्रबंधन करना चाहिए।

 

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न :

प्रश्न 1. खनिज कितने प्रकार के होते हैं? प्रत्येक का सोदाहरण परिचय दें।

उत्तर: यदि सही रूप से कहा जाय तो खनिज सामान्यतः दो प्रकार के होते हैं। वे हैं :
(क) धात्विक खनिज तथा
(ख) अधात्विक खनिज ।
इनका विशेष परिचय निम्नलिखित हैं :

(क) धात्विक खनिज- यह दो प्रकार के होते हैं:

(i) लौहयुक्त खनिज तथा (ii) अलौहयुक्त खनिज ।

 

(i) लौहयुक्त खनिज- जिन धात्विक खनिजों में लोहे की मात्रा अधिक होती है, उन्हें लौह युक्त खनिज कहते हैं। जैसे - लौह अयस्क, मैगनिज, निकल, टंगास्टन आदि ।

 

(ii) अलौहयुक्त खनिज- जिन धात्विक खनिजों में लोहे का अंश क़म होता है या नहीं भी होता है, वे अलौह खनिज कहलाते हैं। जैसे-सोना, चाँदी, सीसा, बॉक्साइड, टिन, ताँबा इत्यादि ।


(ख) अधात्विक खनिज- अधात्विक खनिज भी दो प्रकार के होते हैं। वे हैं:

(i) कार्बनिक खनिज तथा

(ii) अकार्बनिक खनिज ।

 

(i) कार्बनिक खनिज- कार्बनिक खनिज में कार्बन की मात्रा पाई जाती है। लाखों-लाख वर्ष से पृथ्वी के नीचे दबे जीवाष्म होते हैं। इन जीवाष्मों में कार्बन की भी मात्रा होती है। जैसे कोयला, पेट्रोलियम तेल और गैस।

 

(ii) अकार्बनिक खनिज- अकार्बनिक खनिजों में कार्बन की मात्रा नहीं पाई जाती और पाई भी जाती है तो बहुत कम। जैसे अभ्रक, ग्रेफाइट, सोना, चाँदी, ताँबा ।

 

प्रश्न 2. घात्विक एवं अघात्विक खनिजों में क्या अंतर है? तुलना कीजिए। उत्तर: धात्विक खनिज तथा अधात्विक खनिजों में निम्नलिखित अंतर हैं:

धात्विक खनिज

अधात्विक खनिज

1. धात्विक खनिज को तपाने पर वह गल जाता है, जिससे धातु प्राप्त होती है।


2. धात्विक खनिज कठोर और चमकीले होते हैं और ठोकने पर ये आवाज निकालते हैं।



3. धात्विक खनिज प्रायः आग्नेय चट्टानों में ही पाए जाते हैं।


4. धात्विक खनिजों को पीटकर पत्तर या खींचकर तार बनाए जा सकते हैं। पीटने और खींचने पर ये टूटते नहीं।

1. अधात्विक खनिज को तपाने पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता और वह अपने पूर्व रूप में कायम रहता है।


2. अधात्विक खनिज में न तो अधिक कठोरता होती है और न ठोकने पर ये आवाज ही निकालते हैं।


3. अधात्विक खनिज परतदार चट्टानों में पाए जाते हैं।


4.  अधात्विक खनिजों को यदि पीटा जाय तो ये चूर-चूर हो जाएँगे। फलतः इनसे न तो पत्तर और न तार बनाया जा सकता है।

 

प्रश्न 3. भारत की खनिज पेटियों के नाम लिखकर किन्हीं दो का वर्णन कीजिए ।

उत्तर: भारत में तीन खनिज पेटियाँ पाई जाती हैं। वे हैं:

(i) उत्तर-पूर्वी पठार,

(ii) दक्षिण-पश्चिम पठार और

(iii) उत्तर-पश्चिम प्रदेश ।

 

(i) उत्तर-पूर्वी पठार- उत्तर-पूर्वी पठार खनिज की दृष्टि से धनी पेटी है। यह

पेटी छोटानागपुर का पठार, उड़ीसा का पठार, छत्तीसगढ़ का पठार तथा पूर्वी आंध्र प्रदेश का पठार में अवस्थित है। इस पेटी में अनेक खनिज मिलते हैं। इनमें लौह अयस्क, मैंगनीज, अभ्रक, बॉक्साइट, चूना पत्थर, डोलोमाइट, ताँबा, थोरियम, यूरेनियम, क्रोमियम, सिलिमेनाइट तथा फास्फेट का भंडार भरा है।

 

(ii) दक्षिण-पश्चिम पठार- दक्षिण-पश्चिम पठार पेटी कर्नाटक के पठार तथा

तमिलनाडु के पठार पर फैला हुआ है। इस पेटी में लौह अयस्क, मैंगनीज, बॉक्साइट आदि काफी मात्रा में प्राप्य है। देश के सभी सोने की खानें इसी पेटी में अवस्थित हैं।

 

(iii) उत्तर-पश्चिम प्रदेश- उत्तर-पश्चिम पेटी का फैलाव खम्भात की खाड़ी से लेकर अरावली श्रेणियों तक है। यहाँ अनेक अलौह धातुएँ प्राप्त होती हैं। उनमें चांदी सीसा, जस्ता, ताँबा आदि की प्रमुखता है। बलुआ पत्थर, ग्रेनाइट, संगमरमर, जिप्सम, मुल्तानी मिट्टी, डोलोमाइड, चूना पत्थर, सेंधा नमक की प्राप्ति काफी मात्रा में होती है।

 

प्रश्न 4. लौह अयस्क का वर्गीकरण कर उनकी विशेषताओं को लिखिए ।

उत्तर: लौह अयस्क का यदि हम वर्गीकरण करें तो पाते हैं कि ये तीन प्रकार के होते हैं:
(
i) हेमाटाइट,
(ii) मैग्नाटाइट तथा
(
iii) लिमोनाइट।
इन तीनों को क्रमशः लाल. अयस्क
, काला अयस्क तथा पीला अयस्क भी कहते हैं।

 

लौह अयस्क की विशेषताएँ- लौह अयस्क से ही शुद्ध लोहा या इस्पात तैयार होता है। आज की सभ्यता का यह आधार बना हुआ है। उपर्युक्त तीन अयस्कों में हेमाटाइट तथा मैग्नाटाइट उच्च किस्म के अयस्क होते हैं, जिनमे से शुद्ध लोहे की अधिक मात्रा निकलती है। मैग्नेटाइट में चुम्बकीय गुण होता है, इसी कारण उसका नाम मैग्नेटाइट पड़ा है। खास तौर पर हेमाटाइट अयस्क से लोहा बनाया जाता है। अयस्क को अनेक विधियों से गुजार कर लोहा बनाया जाता है। भारत का पहला लोहा बनाने का कारखाना साकची नामक स्थान पर स्थापित हुआ। इसको स्थापित करने वाले जमशेदजी नाशरवान जी टाटा थे। उन्हीं के नाम पर उस जगह का नाम जमशेदपुर तथा रेलवे स्टेशन का टाटानगर रखा गया है। लीमोटाइट अयस्क से बहुत कम मात्रा में लोहा निकलता है।

 

प्रश्न 5. भारत में लौह अयस्क के वितरण पर प्रकाश डालिए ।

उत्तर: वैसे तो भारत में लौह अयस्क की प्राप्ति प्रायः सभी राज्यों में होती है, परन्तु कुल भंडार के लगभग 96 प्रतिशत केवल पाँच राज्यों-कर्नाटक, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, गोवा तथा झारखंड में प्राप्त होता है।

   कर्नाटक राज्य में भारत का प्रायः एक चौथाई लोहा प्राप्त होता है। बल्लारी, हास्पेट, संदूर, चिकमंगलूर जिले के बाबाबूदन की पहाड़ी तथा केमन गूडी की पहाड़िों पर लौह अयस्क फैले हुए हैं। छत्तीसगढ़ राज्य देश का दूसरा सबसे अधिक लौह अयस्क वाला राज्य है। दांतेवाड़ा तथा दुर्ग जिलों में लौह अयस्क तो पाया ही जाता है, उनके अलावा रायगढ़, विलासपुर तथा सरगुजा में भी यह पाया जाता है। उड़ीसा भी देश का एक प्रमुख लौह अयस्क के भंडार वाला राज्य है। इस राज्य की प्रमुख लौह अयस्क की खानें गुरु महिषाणी, बादाम पहाड़ तथा किरीबुरु क्षेत्रों में हैं। लौह अयस्क प्राप्ति के क्षेत्र में गोवा का भारत में चौथा स्थान है। यहाँ की प्रमुख खानें साहकवालिम, संग्यूम, क्यूपेम, सतारी पौंड़ा तथा नियोलिम में अवस्थित हैं। झारखंड भी लौह अयस्क के मामले में देश का एक प्रमुख राज्य है। यहाँ पूरे देश का 15% लौह अयस्क प्राप्त होता है। यहाँ की प्रमुख खानें सिंहभूम, पलामू, धनबाद, हजारीबाग, संथाल परगना तथा राँची जिले में अवस्थित हैं। महाराष्ट्र में चन्द्रपुर, रत्नागिरि और भंडारा जिलों में लौह अयस्क प्राप्त होता है। आंध्र प्रदेश के करीम नगर, बारंगल, कुर्नूल, कड़प्पा आदि जिलों में लौह अयस्क प्राप्त होता है। तमिलनाडु के सलेम तथा नीलगिरि क्षेत्र में लोहे के भंडार हैं।

 

प्रश्न 6. मैंगनीज अथवा बॉक्साइट की उपयोगिता तथा देश में इनके वितरण का वर्णन कीजिए ।

उत्तर: मैंगनीज-भारत में मैंगनीज प्राप्ति के ख्याल से विश्व में इसका तीसरा स्थान है। विश्व के संचित भंडारों में मैनीज की प्राप्ति भारत में होती है। भारत में जितना मैंगनीज है, उसका 78 प्रतिशत से भी अधिक की प्राप्ति नागपुर और भंडारा जिलों से लेकर मध्य प्रदेश के बालाघाट तथा छन्दवाड़ा जिलों में ही हो जाती है। उड़ीसा भी मैंगनीज प्राप्ति में अग्रणी है। यहाँ भारत के कुल मैंगनीज का 37 प्रतिशत प्राप्त होता है। यहाँ इसकी मुख्य खानें सुन्दरगढ़, कालाहांड़ी, रायगढ़, बोलांगीर, क्योंझर, जाममुर एवं मयूर भंज जिलों में हैं। महाराष्ट्र राज्य मैंगनीज उत्पादन में सम्भवतः भारत का पहला राज्य है जो सबसे अधिक उत्पादन करता है। यह लगभग देश के कुल उत्पादन का 25 प्रतिशत उत्पादन कर लेता है। मैंगनीज की उत्पादन की मुख्य पेटी नागपुर तथा भंडारा जिलों में है। इस पेटी में अच्छे प्रकार के मैंगनीज मिलते हैं। महाराष्ट्र के रत्नागिरि जिले में भी उच्च कोटि के मैगनीज मिलते हैं। मध्य प्रदेश राज्य में भी मैंगनीज प्राप्त होते हैं। यहाँ देश के कुल उत्पादन का 21 प्रतिशत मैंगनीज प्राप्त होता है। इस राज्य के बालाघाट तथा छिन्दवाड़ा जिलों में इसका उत्पादन होता है। कर्नाटक में मैंगनीज शिमोगा, चित्रदुर्ग, तुसकूर, बेलारी, उत्तरी कनारा, धारवाड़, चिक मंगलूर और बीजापुर जिले मुख्य उत्पादक जिले हैं। यहाँ भी देश के कुल उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत होता है। आंध्र प्रदेश में भी कुछ मैंगनीज मिलता है। श्रीकाकुलम, विशाखापत्तनम, कुडप्पा, विजयनगर तथा गुंटूर जिले मैंगनीज के मुख्य उत्पादक जिले हैं।

   बॉक्साइट वैसे तो बॉक्साइट की प्राप्ति भारत के लगभग हर भाग में हो जाती है, लेकिन मुख्यतः इसके भंडारण में उड़ीसा, गुजरात, झारखंड, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तमिलनाडु एवं उत्तर प्रदेश प्रमुख स्थान रखते हैं। बॉक्साइट का लगभग 50% भाग उड़ीसा राज्य में मिल जाता है। इसके बाद गुजरात, झारखंड, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तमिलनाडु तथा उत्तर प्रदेश राज्यों का स्थान है।

   उड़ीसा राज्य के कालाहांड़ी, बालंगीर, कोरापुर, सुन्दरगढ़ तथा संभलपुर जिले बॉक्साइट के प्रमुख उत्पादक जिले हैं। गुजरात राज्य के जामनगर, कैरा, साबरकंठा, कच्छ तथा सूरत जिले बॉक्साइट के प्रमुख उत्पादक जिले हैं। झारखंड देश में तीसरा राज्य है जहाँ बॉक्साइट प्राप्त होता है। लोहरदगा, राँची, लातेहार तथा पलामू जिलों में इसकी प्राप्ति होती है। महाराष्ट्र राज्य के कोलाबा, रत्नगिरी और कोल्हापुर जिलों में बाक्साइट प्राप्त होता है। छत्तीसगढ़ जिला में भी बाक्साइट की प्राप्ति होती है, जो पहले मध्य प्रदेश राज्य का ही एक भाग था। सरगूजा, रायगढ़ तथा विलासपुर जिले यहाँ बॉक्साइट के लिए प्रसिद्ध है। इन स्थानों के अलावा कर्नाटक राज्य के बेलगाँव, तमिलनाडु के नीलगिरी, सलेम, मदुरई और कोयम्बटूर, उत्तर प्रदेश का बाँदा जिला, जम्मू-कश्मीर के पूंछ तथा उधमपुर जिलों में बॉक्साइट की अच्छी प्राप्ति हो जाती है।

(मैंगनीज या बॉक्साइट में से किसी एक को ही लिखें।)

 

प्रश्न 7. अभ्रक की उपयोगिता एवं वितरण पर प्रकाश डालिए ।

उत्तर: अभ्रक एक विद्युतरोधी अधात्विक खनिज है। इसका अधिक उपयोग, विद्युतरोधी उपकरण बनाने में ही होता है। कुछ आयुर्वेदिक औषधियों को बनाने में भी अभ्रक का उपयोग होता है।

   भारत में प्राप्ति की दृष्टि से अभ्रक की तीन पेटियाँ हैं, जो बिहार-झारखंड, आंध्र प्रदेश तथा राजस्थान राज्यों में अवस्थित हैं। सबसे उत्तम कोटि का अभ्रक बिहार-झारखंड राज्यों में पाया जाता है, जिसे रुबी अभ्रक कहते हैं। बिहार में गया जिला से होते हुए मुंगेर तथा भागलपुर तक अभक मिलता है, वहीं झारखंड राज्य में कोडरमा, हजारीबाग, धनबाद, पलामू, राँची एवं सिंहभूम जिले अभक उत्पादन में एक स्थान रखते हैं। इनमें सर्वाधिक अभ्रक कोडरमा तथा हजारीबाग में मिलता है और वह भी उच्च कोटि का। भारत की कुल प्राप्ति की 80 प्रतिशत केवल बिहार-झारखंड राज्यों में ही हो जाती है। शेष आंध प्रदेश तथा राजस्थान में प्राप्त होता है। आंध प्रदेश के मात्र नैलूर जिले में ही अभक मिलता है, लेकिन देश के कुल उत्पादन में यह अपना दूसरा स्थान बनाए हुए है। तीसरा स्थान राजस्थान का है। यहाँ के जयपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा, अजमेर आदि जिले अभ्रक उत्पादन में मशहूर हैं।

 

प्रश्न 8. खनिजों के संरक्षण के उपाय सुझाइए ।

उत्तर: सभी खनिज क्षरणशील तथा अनवीकरणीय संसाधन हैं। इनकी मात्रा असीमित नहीं हैं। कभी-न-कभी ये समाप्त होंगे ही। अतः ये शीघ्र समाप्त नहीं हों और इनका लाभ हमारी अगली पीढ़ियाँ भी उठा सकें, इसके लिए हमें इन्हें बचाकर रखना है। बचाकर रखने का तात्पर्य यह नहीं है कि हम उनका उपयोग ही नहीं करें। उपयोग करें, किन्तु मितव्ययितापूर्वक । ये खनिज ही हैं, जो उद्योगों के आधार हैं और सभ्यता को आगे बढ़ाते हैं और उसको कायम रखते हैं और हमें इस आधुनिक सभ्यता को बनाए रखना है। वास्तव में खनिजों का संरक्षण विवेकपूर्ण उपयोग पर निर्भर करता है और विवेकपूर्ण उपयोग तीन बातों पर निर्भर है:
(क) खनिजों के निरंतर दोहन पर नियंत्रण
,
(ख) उनका बचतपूर्वक उपयोग तथा
(ग) कच्चे माल के रूप में उनके प्रतिस्थापक की खोज ।
उनके विकल्पों की खोज तो हो ही
, खनिजों के अपशिष्ट का बुद्धिमतापूर्ण उपयोग किया जाय। उनका उपयोग भी इस प्रकार किया जाय ताकि पारिस्थितिकी पर कोई कुप्रभाव न पड़े ताकि पर्यावरण सुरक्षित बना रहे। यदि हम खनिजों का संरक्षण भी करें और साथ-साथ प्रबंधन पर भी ध्यान दें तो खनिजों के संकट से हम ही नहीं, हमारी पीढ़ियों को भी कोई कठिनाई नहीं होगी।

 

कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न तथा उनके उत्तर

प्रश्न 1. भारत में अधिकांशि खनिज किन तीन पेटियों में पाए जाते हैं?

उत्तर: भारत में अधिकांश खनिज निम्नलिखित तीन पेटियों में पाए जाते हैं :
(
i) उत्तर-पूर्वी पठार,
(ii) दक्षिणी-पश्चिमी पठार तथा

(iii) उत्तर-पश्चिमी पठार ।

 

प्रश्न 2. कुछ प्रमुख धात्विक खनिजों के नाम लिखिए ।

उत्तर: प्रमुख धात्विक खनिजों के नाम हैं :

(i) लौह अयस्क,

(ii) मैंगनीज,

(iii) क्रोमाइट,

(iv) पाइराइट तथा

(v) निकिल ।

 

प्रश्न 3. भारत तें पिछले किन्हीं तीन वर्षों में लौह अयस्क उत्पादन की मात्रा बताइए ।

उत्तर: भारत में पिछले तीन वर्षों में लौह अयस्क का उत्पादन :

वर्ष

उत्पादन (हजार टन में)

2005-2006

165230

2006-2007

180917

2007-2008

206939

 

The   End 

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