Page 531 Class 10th Non - Hindi Book Solution पाठ - 8 बच्चे की दुआ
पाठ - 8 बच्चे की दुआ
प्रश्न 1. आपको यदि अल्लाह/ ईश्वर से कुछ माँगने की जरूरत हो
तो आप क्या-क्या माँगेगे?
उत्तर: हम अल्लाह ईश्वर से ज्ञान, विद्या, आरोग्यता
तथा परोपकार की भावना की माँग करेंगे।
प्रश्न 2. कविता में संसार को बेहतर बनाने की कामना मुखर हुई
है। इन कामनाओं को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: हे ईश्वर मुझसे मेरे वतन की शोभा बढ़े। बढ़े। जिस तरह फूल खलकर
फूलवारी की रौनक को बढ़ा देता है दम पर दुनिया की अज्ञानता को दूर कर कर दूं। मैं अपने
कर्म से हरेक क्षेत्र में खुशी ला हूँ। है। मैं अपने
पाठ से आगे
प्रश्न 1. अल्लाह बुराई से बचाना मुझको तथा नेक राह में चलने
की शक्ति प्रदान करना-नज्म की किन पंक्तियों में ऐसा भाव स्पष्ट किया गया है? नज्म की उन पंक्तियों को लिखिए।
उत्तर: मेरे अल्लाल बुराई से बचाना मुझको। नेक जो राह हो, उस राह
पे चलाना मुझको ।।
प्रश्न 2. आपके घर में या पड़ोस में बुजुर्ग होंगे, आप उनकी देखभाल कैसे करना चाहेंगे? उल्लेख कीजिए।
उत्तर: हमारे घर या पड़ोस में जो बुजुर्ग हैं मैं उनकी देखभाल उनकी
सेवा तथा जरूरत की चीजें को पूरा करके करूँगा।
प्रश्न 3. अल्लाह और ईश्वर में कोई फर्क नहीं है इस बात से
आप कहाँ तक सहमत हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: अल्लाह या ईश्वर एक ही का नाम है। इस बात से हम पूर्ण रूप से
सहमत हैं। दोनों नाम भगवान के पर्यायवाची मान लेना चाहिए।
प्रश्न 4. व्याख्या कीजिए
(क) जिन्दगी हो मेरी परवाने की सूरत या रब। इल्म की शम्मा से
ही मुझको मुहब्बत या - रब
उत्तर: प्रस्तुत नज्म हमारे पाठ्य पुस्तक किसलय भाग-3 के
"बच्चे की दुआ" पाठ से लिया गया है जिसके गायक हैं-"मो. इकबाल"।
इस नज्मे
में बच्चे भगवान से प्रार्थना करते हैं कि हे ईश्वर! मेरी जिन्दगी परोपकार के लिए हो।
शिक्षा प्राप्ति से मुझे मुहब्बत हो।
(ख) हो मेरे दम से यूं ही मेरे वतन की जीनत। जिस तरह फूल से होती
है चमन की जीनत ।
उत्तर: प्रस्तुत नज्मे हमारे पाठ्य पुस्तक "किसलय भाग-3" के "बच्चे की दुआ" पाठ से लिया गया है। यह पाठ मो० इकबाल की रचना है।
इस नज्म में कहा गया है कि हे प्रभो! मैं अपने बल पर दुनिया की शोभा बढ़ा दूं। जैसे
फूल से फूलवारी की शोभा बढ़ जाती है।
(ग) मेरे अल्लाह बुराई से बचाना मुझको। नेक जो राह हो, उस राह पे चलाना मुझको।
उत्तर: से लिया गया है। यह पाठ मो. प्रस्तुत नज्मे हमारे पाठ्य पुस्तक
"किसलय भाग-3"
के "बच्चे की दुआ" पाठ से इकबाल की रचना है। इस नज्म
में बच्चे भगवान से से प्रार्थना करते हैं कि हे मेरे अल्लाह/ ईश्वर मुझे बुराई से
बचाना तथा जो नेक राह हो उसी राह पर चलाने की कृपा करना ।
इन्हें भी जानिए
प्रश्न 1. पाठ में अनेक शब्द दिए गए हैं, जिनमें नुक्ते का प्रयोग है।
उर्दू के विभिन्न वर्गों के नीचे बिंदु का प्रयोग होता है। इन्हें नुक्ता कहते हैं। नुक्ते का प्रयोग पाँच वर्गों
में होता है - क, ख, , ख, ग, ज, फ। इनके चलते अर्थों में बदलाव आ जाता है । पाठ से
ऐसे शब्दों को चुनकर लिखिए जिसके नीचे नुक्ता लगा है।
उत्तर:
1. जींदगी
2. खुदाया
3. जीनत
4. गरीबों
5. जईफों
बच्चे की दुआ - सारांश
लब पे आती है ……………….. खुदाया मेरी।
अर्थ: हे ईश्वर मेरी तमन्ना प्रार्थना बनकर मेरे होंठ पर आ जाती है। ‘मेरी जिन्दगी आनन्द से पूर्ण हो
जाय ।
दूर दुनिया का मेरे ……………….. उजाला हो जाय।
अर्थ: मेरी शक्ति से दुनिया का अंधेरा दूर हो जाय । हर जगह मेरे चमकने से उजाला हो जाय
। अर्थात् मैं अपने ज्ञान से लोगों की अज्ञानता को दूर कर सकूँ।
हो मेरे दम से यूँ……………….. चमक की जीनत ।
अर्थ: मेरी शक्ति से हमारी मातृभूमि की शोभा बढ़े। जिस तरह फूल से होती है, फूलवारी की शोभा।
जिन्दगी हो मेरी …………… मुहब्बत यारब।
अर्थ: हे प्रभो ! मेरी जिन्दगी परोपकार
के लिए हो । हे प्रभो। मुझे ज्ञान र प्रति मुहब्बत (प्रेम) हो।
गरीबों ………………. मुहब्बत करना।
अर्थ: हे भगवान! मेरा काम गरीबों की भलाई के लिए हो तथा मेरा एवं बूढ़ों से प्रेम करना हो। साह बुराई …….चलाना मुझको। हे मेरे अल्लाह मुझको बुराई से बचाना तथा अच्छे मार्ग पर को अग्रसर करना।