Page 540 Class 10th Non - Hindi Book Solution पाठ - 17 खुशबू रचते हैं हाथ

पाठ - 17 खुशबू रचते हैं हाथ


प्रश्न 1. खुशबू रचने वाले हाथ कैसी परिस्थितियों में रह रहे हैं?

उत्तर: बनाकर संसार को खुशबू प्रदान करते हैं। वे लोग विषम खुशबू रचने वाले हाथ अर्थात् जी लोग अगरबत्तियाँ बना परिस्थितियों में रह रहे हैं। उनके टोले या मुहल्ले तथा गली गंदगियों से भरे रहते हैं। उनके वस्त्र भी प्रायः मैले-कुचैले होते हैं।

 

प्रश्न 2. खुशबू रचते हैं हाथ से क्या तात्पर्य है ?

उत्तर: खुशबू रचते हैं हाथ" से तात्पर्य है खुशबूदार विविध प्रकार की अगरबतियाँ बनाने वाले लोग।

 

पाठ से आगे

प्रश्न 1. आपके विचार से इस कविता का मुख्य उद्देश्य क्या हो सकता है?

उत्तर: हमारे विचार से से इस कविता का मुख्य उद्देश्य लघु उद्योग में जुड़े लोगों की परिस्थितियों को जानकारी देना।


प्रश्न
2. व्याख्या कीजिए
यहीं इस गली में बनती हैं
मुल्क की मशहूर अगरबत्तियाँ
इन्हीं गंदे मुहल्लों के गंदे लोग।
बनाते हैं केवड़ा
, गुलाब, खस और रातरानी अगरबत्तियाँ ।

उत्तर:

प्रस्तुत पंक्तियाँ अरूण कमल" जी रचित "खुशब रचते हैं। हाथ" कविता से उधृत हैं। जिसमें लघु उद्योग वाले मुहल्लों/गलियों या टोले. की परिस्थितियों को दर्शाया गया है।

यह उद्योग जिस गली में होते हैं वह स्थान गंदगियों से भरा होता है। दुर्गन्धों से भरे उस स्थान पर रहकर भी लोग अपने हाथों से केवड़ा, गुलाब, खस; रातरानी इत्यादि सुगन्धयुक्त अगरबत्तियों का निर्माण करते हैं।

 

प्रश्न 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(क)
उभरी नसों वाले हाथ" का क्या अर्थ है ?

उत्तर: "उभरी नसों वाले हाथ" का अर्थ है बूढ़े लोग।

 

(ख) "पीपल के पत्ते से नए-नए हाथ" का क्या अर्थ है?

उत्तर: "पीपल के पत्ते से नए-नए हाथ" का अर्थ है नन्हें नन्हें बच्चों का कोमल हाथ ।

 

प्रश्न 4. अमीरी एवं गरीबी की खाई को कैसे पाटा जा सकता है-अपना सुझाव दीजिए।

उत्तर: अमीरी एवं गरीबी अर्थात् अमीर और गरीब के बीच की खाईयों को हम साम्यवाद के द्वारा ला सकते हैं। जिसके अन्दर अमीर लोग गरीबों को मदद देकर उनकी उन्नति में सहायक बनें।

सरकार भी गरीबों के रोजगारयुक्त करने के लिए यथोचित मदद करें। गरीब लोगों को रोजगार प्रदान करें तो अमीरी-गरीबी के बीच खाई पाटा जा सकता है।

 

खुशबू रचते हैं हाथ - सारांश

भावार्थ जहाँ हाथ से रच-रचकर खुशबूदार अगरबत्तियाँ बनाई जाती उस लघु उद्योग वाले स्थान प्रायः गंदे होते हैं। यह उद्योग प्रायः गली, नालों के किनारे, कुड़े के ढेरों के बगल में ही होते हैं। इस उद्योग में काम करने वाले बूढ़े, जवान, बच्चे एवं नवयुवतियाँ भी होती हैं । इस उद्योग में जुड़े लोग प्रायः गंदे दिखते हैं लेकिन वे अपने हाथों से खुशबूदार विविध प्रकार की अगरबत्तियों का निर्माण करते हैं।