Page 546 Class 10th Non - Hindi Book Solution पाठ 23 राह भटके हिरन के बच्चे को

पाठ 23 राह भटके हिरन के बच्चे को

भावार्थ कवि ने देखा एक हिरण का छोटा बच्चा खेलने के चक्कर में मस्त होकर राह भटककर पहाड़ पर रो रहा है। उसके आँखों में माँ से बिछुड़ने की वेदना है। कवि उस छोटे हिरन छौने से कहता है। अरे हिरन-शावक मत रोओ, सो जाओ, तेरी माँ तुझे अवश्य मिलेगी।

बाँस के वन में अकवन के वन में रात की ठंडी हवा तुझे लोरी सुनाकर सुलायेगी। बेहिचक सो जा।

ऊपर आकाश में तारे, नीचे गिरे नरम-नरम पत्ते के ढेर पर सो जा । सुबह होते ही जब सूर्योदय होगा, किरणें फैल जायेगी तो तुम्हारी माँ तुझे मिले जायेगी।