Page 452 CLASS 10TH GEOGRAPHY NCERT BOOK SOLUTIONS खंड: (ख) Unit 2. प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन : बाढ़ एवं सुखाड
इकाई – 2
प्राकृतिक
आपदा एवं प्रबंधन : बाढ़ एवं सुखाड
वस्तुनिष्ठ प्रश्न :
प्रश्न 1. नदियों में बाढ़ आने का प्रमुख कारण क्या
है ?
(क) जल की अधिकता
(ख) नदी की तली में अवसाद का जमाव
(ग) वर्षा का अधिक होना
(घ) तटबंध की ऊँचाई का कम होना
उत्तर: (ग) वर्षा का अधिक होना
प्रश्न 2. बिहार का कौन-सा क्षेत्र बाढ़ग्रस्त क्षेत्र
है ?
(क) पूर्वी बिहार
(ख) दक्षिण बिहार
(ग) पश्चिम बिहार
(घ) उत्तर बिहार
उत्तर: (घ) उत्तर बिहार
प्रश्न 3. निम्नलिखित में किस नदी को 'बिहार का शोक' कहा जाता है ?
(क) गंगा
(ख) गंडक
(ग) कोसी
(घ) पुनपुन
उत्तर: (ग) कोसी
प्रश्न 4. बाढ़ क्या है ?
(क) प्राकृतिक आपदा
(ख) मानव जनित आपदा
(ग) सामान्य आपदा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (क) प्राकृतिक आपदा
प्रश्न 5. सूखा किस प्रकार की आपदा है?
(क) प्राकृतिक आपदा
(ख) मानवीय आपदा
(ग) सामान्य आपदा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (क) प्राकृतिक आपदा
प्रश्न 6. सूखे की स्थिति किस प्रकार आती है ?
(क) अचानक
(ख) पूर्व सूचना के अनुसार
(ग) धीरे-धीरे
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (ग) धीरे-धीरे
प्रश्न 7. सूखे के लिए जिम्मेवार कारक है ?
(क) वर्षा की कमी
(ख) भूकंप
(ग) बाढ़
(घ) ज्वालामुखी क्रिया
उत्तर: (क) वर्षा की कमी
प्रश्न 8. सूखे से बचाव का एक मुख्य तरीका है :
(क) नदियों को आपस में जोड़ देना
(ख) वर्षा जल संग्रह करना
(ग) बाढ़ की स्थिति उत्पन्न करना
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (ख) वर्षा जल संग्रह करना
लघु उत्तरीय प्रश्न :
प्रश्न 1. बाढ़ कैसे आती है? स्पष्ट करें ।
उत्तर: बाढ़ आने के अनेक कारण हैं। अकस्मात अधिक वर्षा के कारण एकाएक
अधिक पानी बढ़ जाने से नदी में बाढ़ आ जाती है। नदी के पदे में बालूआ गाद वर्षों-वर्ष
से जमा होकर नदी में पानी रखने की क्षमता कम हो जाती है। नतीजा होता है कि बरसात में
अधिक वर्षा होने से उस नदी में बाढ़ आ जाती है, कारण कि जिस गति से पानी बढ़ता है उस गति से पानी
आगे नहीं बढ़ पाता, इधर पानी धारण करने की क्षमता समाप्त-सी रहती है। फलतः बाढ़
आ जाती है। तटबंध के टूटने से भी बाढ़ आ जाती है।
प्रश्न 2. बाढ़ से होने वाली हानियों की चर्चा करें।
उत्तर: बाढ़ से होने वाली हानियाँ अनेक हैं। हजारों लोगे बेघर-बार हो
जाते हैं। कुछ बह भी जाते हैं। खेतों में लगी फसल बर्बाद हो जाती है। सड़कें टूट जाती
हैं। लोग असहाय हो जाते हैं। बाढ़ में पशुओं को भी बहते देखा गया है। साँप अपने बीलों
से निकलकर घरों में प्रवेश कर जाते हैं या ऊँचे स्थानों पर अपना बास खोजते हैं। मकानों
के गिरने और दहने-बहने के कारण लोग आवासविहीन हो जाते हैं। बाढ़ के समाप्त होते ही
महामारी फैल जाती है। कुँओं का पानी दूषित हो जाता है। सरकार का स्वास्थ्य विभाग इसकी
देखभाल करता है।
प्रश्न 3. बाढ़ से सुरक्षा
हेतु अपनाई जाने वाली सावधानियों को लिखें ।
उत्तर: बाढ़ से सुरक्षा हेतु अपनाई जाने वाली सावधानियाँ अनेक हैं, इनमें एक या दो अथवा सभी उपायों को अपनाया जा सकता है। सबसे
पहले नदी की पेटी में जम चुकी गाद की गहराई तक सफाई की जाय ताकि नदी में जल धारण करने
की क्षमता में वृद्धि हो जाय। दूसरी यह कि नदी के दोनों तटों पर बाँध (तटबंध) का निर्माण
कराया जाय। जिस नदी में लगातार प्रतिवर्ष बाढ़ आती है, उस नदी से यत्र तत्र नहरें निकालकर उन्हें अन्य नदियों से जोड़कर
नदी में जल के भार को कम किया जा सकता है।
प्रश्न 4. बाढ़ नियंत्रण के लिए उपाय बताएँ ।
उत्तर: बाढ़ से सुरक्षा हेतु अपनाई जाने वाली सावधानियाँ अनेक हैं, इनमें एक या दो अथवा सभी उपायों को अपनाया जा सकता है। सबसे
पहले नदी की पेटी में जम चुकी गाद की गहराई तक सफाई की जाय ताकि नदी में जल धारण करने
की क्षमता में वृद्धि हो जाय। दूसरी यह कि नदी के दोनों तटों पर बाँध (तटबंध) का निर्माण
कराया जाय। जिस नदी में लगातार प्रतिवर्ष बाढ़ आती है, उस नदी से यत्र तत्र नहरें निकालकर उन्हें अन्य नदियों से जोड़कर
नदी में जल के भार को कम किया जा सकता है।
प्रश्न 5. सूखे की स्थिति को परिभाषित कीजिए ।
उत्तर: किसी-किसी वर्ष मॉनसून धोखा दे जाता है और वर्षा नहीं हो पाती।
वास्तव में सूखा इसी कारण आता है। जब सूखा आता है तो फसलें नहीं लगाई जा सकतीं और यदि
लगा भी दी गई हों तो सूख जाती हैं। फलतः अन्न की कमी हो जाती है। बाहर से अन्न मँगाना
पड़ता है। इससे महँगाई बढ़ जाती है। फसल के नहीं उपजने से चारा भी नहीं उपजता, जिससे मवेशियों के लिए चारे की किल्लत हो जाती है और चारा घोटाला
तक होने लगता है।
प्रश्न 6. सूखा के लिए जिम्मेवार कारकों का वर्णन
करें ।
उत्तर: सूखा के लिए जिम्मेवार कारक हैं: (i) वर्षा की कमी, (ii) नहरों तथा तालाबों की कमी, (iii) बिजली की कमी तथा (iv) बोरिंग की व्यवस्था का अभाव ।
जिस गति से जनसंख्या बढ़ रही है, उसी अनुपात में अन्न की उपज को बढ़ाना आवश्यक है, लेकिन उपर्युक्त कमी के अलावा अब गाँव के धनी-मानी लोग कुँए
खुदवाना छोड़ दिए हैं। जो कुँए हैं भी, वे देख-रेख के अभाव में नष्ट होते जा रहे हैं। भूमिगत
जल स्तर नीचे दूर-से-दूर भागता जा रहा है।
प्रश्न 7. सूखा से बचाव के तरीकों का उल्लेख कीजिए
।
उत्तर: सूखा से बचाव के मुख्यतः दो योजनाएँ अपनाई जाती हैं (क) दीर्घकालीन
तथा (ख) लघुकालीन ।
दीर्घकालीन योजना में (i) नहर, (ii) तालाब, (iii) कुँआ, (iv) पइन तथा (v) आहर का निर्माण किया जाता है। वहीं अल्पकालीन योजना
में बोरिंग कराकर बिजली-पम्प द्वारा जल का दोहन किया जाता है और सिंचाई की जाती है।
पेयजल की समस्या को दूर करने के लिए अन्यत्र से टैंकों में पानी मँगाकर जनता में वितरित
किया जाता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न :
प्रश्न 1. बिहार में बाढ़ की स्थिति का वर्णन करें
।
उत्तर: बिहार, उसमें भी उत्तर बिहार बाढ़ के लिए काफी बदनाम रहा
है। उत्तर बिहार में लगभग प्रति वर्ष बाढ़ आने का कारण है कि हिमालय पहाड़ ठीक इसके
सटे उत्तर में है नेपाल, जो हिमालय क्षेत्र में अवस्थित है। हिमालय से निकलने वाली नदियों
की एक श्रृंखला है, जिनमें कुछ तो बड़ी नदियाँ हैं और अधिक छोटी नदियाँ हैं। छोटी
नदियाँ कम जल से भी उपला जाती हैं और बाढ़ की स्थिति ला देती हैं। जिस वर्ष हिमालय
क्षेत्र में वर्षा अधिक हो जाती है, उस वर्ष निश्चित रूप से बिहार बाढ़ से तबाह हो जाता
है। कारण कि जो भी वर्षा होती है हिमालय के दक्षिणी ढाल पर ही होती है, जिसका पानी बहकर बिहार की नदियों में ही आता है। इस जल की अधिकता
को छोटी नदियाँ सम्भाल नहीं पातीं और अपने दोनों ओर के तटवर्ती गाँवों को तवाही में
डाल देती हैं। बचाव के अनेक उपाय करने के बावजूद कोई न कोई क्षेत्र बाढ़ से तबाह होता
ही है। एक जमाना था कि कोसी नदी को बिहार का शोक कहा जाता था। केन्द्र सरकार के सहयोग
से नेपाल सरकार से समझौता हुआ और हुनमान नगर में एक ऊँचा बाँध और बराज बना। तबसे कोसी
क्षेत्र के लोग खुशहाल हो गए और इस बात को भूल गए कि कोसी कभी बिहार का शोक थी। फिर
भी 2008 में ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई कि इससे बाँध-वराज से
सम्बद्ध कुसहा नामक स्थान पर पानी का इतना दबाव पड़ा कि वह टूट गया। फलतः कोसी की अनेक
धाराएँ बन गईं और वह एक सौ किलोमीटर पूरब तक खिसक गई। बाँध की मरम्मती के लिए बिहार
असहाय था। केन्द्र सरकार ने कुछ ध्यान नहीं दिया, दिया भी तो काफी देर
से। बाँध पुनः ठीक हो गया है। अब आगे देखना है।
प्रश्न 2. बाढ़ के कारणों एवं इससे सुरक्षा सम्बंधी
उपायों का विस्तृत वर्णन कीजिए ।
उत्तर: अधिक वर्षा के कारण एकाएक अधिक जल के आने से बाढ़ आ जाती है।
कहीं बाँध के टूटने से भी बाढ़ आती है। 2008 में कोसी क्षेत्र में आई बाढ़ा का कारण भी बाँध
का टूटना ही था। कुसहा में बाँध के टूटने से इतना पानी आ गया कि कोसी नदी 100 किमी पूरब खिसक गई और उसकी अनेक धाराएँ निकलकर बहने लगी थीं।
इस आपदा में लाखों लोग फँस गए। उन्हें शिविरों में ठहराया गया। बिहार सरकार के अलावे
अनेक स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा भोजन की व्यवस्था की गई। केन्द्र सरकार के आश्वासन
देने के बावजूद वह कुछ मदद नहीं दे सकी। इसे अमानवीयता का हद ही कहा जाएगा।
बाढ़ से बचाव का प्रयास अंग्रेजी शासन के समय से ही हो रहा है।
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश की निर्वाचित सरकार ने भी उस प्रयास को आगे बढ़ाते
रहने का काम जारी रखा। बाढ़ वाली नदियों के दोनों तटों पर बाँध (तटबंध) बनवाए गए। केवल
तटबंध बंधवाए ही नहीं गए, बल्कि उनकी मरम्मती का काम भी सालों-साल होते रहते हैं। बाढ़
से बचाव के काम में केवल बिहार या भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के अनेक
देश लगे हुए हैं। चीन, मिस्र, संयुक्त राज्य अमेरिका, पाकिस्तान, नाइजीरिया आदि अनेक देश बाढ़ से डरे रहते हैं और
बाढ़ से रक्षा के उपाय में लगे हुए हैं। ये देश भी उसी कारण से डरे रहते हैं, जिस कारण 2008 में कोसी क्षेत्र में बाढ़ आई थी। बिजली उत्पादन
के लिए बने जलाशय के बाँध के टूटने से ही यहाँ बाढ़ आई थी और उन देशों में भी इसी का
डर बना रहता है। लेकिन उन देशों ने पहले से ही प्रबंध कर रखे हैं कि यदि जल की वृद्धि
हो जाय तो उसकी निकासी भी आसानी से हो जाय। भारत और वह भी बिहार में भी वैसी व्यवस्था
होनी चाहिए।
प्रश्न 3. सूखा के कारणों एवं इसके बचाव के तरीकों
का विस्तृत वर्णन करें ।
उत्तर: सूखा का मुख्य कारण है अवर्षण। अवर्षण की स्थिति तब उत्पन्न
होती है, जब मॉनसून धोखा दे देता है। भारतीय कृषि मॉनसूनी वर्षा पर ही
आधारित है। यदि मॉनसून समय पर आ गया और पर्याप्त पानी दे गया, तब तो ठीक वरना इसका उल्टाहोने पर स्थित विषम हो जाती है। सूखे
की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। कभी-कभी सूखे का सामना तब भी करना पड़ता है जब नहर के
रहने के बावजूद उसमें पानी नहीं आता या उससे पानी नहीं छोड़ा जाता ।
सूखे से बचाव के अनेक तरीके हैं। मुख्य तरीका नहर, तालाब, कुँआ, पइन, आहर आदि को बनवाना और उनकी मरम्मत की व्यवस्था करना।
यह सब काम सरकार कराती है। व्यक्तिगत तौर पर सूखे से बचाव का तरीका है ट्यूबवेल हलवाना
और पम्प से पानी खींचकर सिचाई करना। पम्प दो तरीकों से चलाए जाते हैं एक है डीजल से
चलने वाले इंजन, जो पम्प को चलाते हैं। दूसरा है बिजली मोटर, जो बिजली से चालित होता है। इसके लिए सरकार को लगना पड़ता है
ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली पहुँचाई जा सके । डीजल भी उपलब्ध हो और बिजली भी
मिलती रहे तो फसल सूखने नहीं पाती। नहर से नदी का पानी खेतों तक पहुँचाया जाता है।
तालाबों में वर्षा जल एकत्र किया जाता है, ताकि मौके पर काम आए। इसी प्रकार सूखे से बचाव का
प्रबंध किया जाता है।
कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण
प्रश्न तथा उनके उत्तर
प्रश्न 1. भारत में सूखा आने वाले कितने क्षेत्रों
की पहचान की गई है और वे किन-किन राज्यों में अवस्थित हैं?
उत्तर: भारत सरकार ने भारत में 77 जिलों की पहचान की है।
इन जिलों में प्रायः प्रति वर्ष सूखे की आशंका बनी रहती है। ये जिले मुख्यतः राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश राज्य में अवस्थित हैं।
प्रश्न 2. उन्नीसवीं शताब्दी से लेकर आज तक भारत
में जो सूखा आया और दुर्भिक्ष की स्थिति आई उनका उल्लेख करें।
उत्तर: उन्नीसवीं शताब्दी में पहला सूखा 1817 और 1899 में आया। ये दोनों सूखे अति भयंकर थे। उनके बाद
बीसवीं शताब्दी का पहला सूखा 1918, दूसरा 1966 और तीसरा 1987 में भयंकर सूखा का सामना करना पड़ा। 21 वीं शताब्दी में 2009 में मॉनसून के शुरुआती वर्षों में भी मॉनसून नहीं
आया था।
प्रश्न 3. सिंचाई आयोग के अनुसार प्रत्येक वर्ष भारत
में कितने प्रतिशत भूमि पर सूखे की स्थिति उत्पन्न हो जाती है?
उत्तर: सिचाई आयोग के अनुमान के अनुसार भारत में प्रत्येक वर्ष लगभग
16 प्रतिशत भू-भाग पर सूखे की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। यह एक
अनुमान है, वह भी पूरे देश को मिलकर औसतन है।
प्रश्न 4. भूमिगत जल क्या है?
उत्तर: कुँआ, नलकूप आदि से जो पानी प्राप्त करते हैं, वह भूमिगत जल से ही हमें प्राप्त होता है। पहले यह समझा जाता था कि भूमिगत जल का भंडार असीमित है और हम जितना चाहें इसका उपयोग कर सकते हैं। लेकिन जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ती गई, और उन्नोत्पादन बढ़ाने के लिए सिंचाई के लिए जल का दोहन बढ़ने लगा, वैसे-वैसे भूमिगत जल का स्तर नीचे भागने लगा। इसका एकमात्र उपाय है वर्षा जल को किसी भी प्रकार भूमि के अन्दर पहुँचाया जाय। इससे भूमिगत जल शीघ्र भागने नहीं पाएगा।
The End
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